नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(डूटा) के आह्वान पर दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में 12 महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए ‘न्याय मार्च’ में शामिल हुए। यह मार्च दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के गेट नंबर 1 से शुरू होकर उपराज्यपाल निवास तक निकाला गया। मार्च के दौरान शिक्षकों ने लंबे समय से चली आ रही अस्थायी नियुक्ति व्यवस्था को समाप्त करने, पात्र शिक्षकों का तत्काल नियमितीकरण एवं समायोजन करने तथा वर्षों से लंबित समस्या के समयबद्ध समाधान की मांग उठाई। शिक्षकों ने हाथों में तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए अपनी मांगों को सामने रखा तथा उपराज्यपाल से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की। डूटा की ओर से दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें लंबे समय से लंबित इस विषय पर उचित निर्देश जारी कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की मांग की गई। डूटा के अनुसार, ये 12 महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय के घटक महाविद्यालय है और इनके रखरखाव तथा विकास के लिए दिल्ली सरकार के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से 100 प्रतिशत अनुदान प्राप्त होता है। डूटा अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी ने कहा कि इन महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षक पिछले पांच वर्ष से लेकर बीस वर्ष से भी अधिक समय से अस्थायी आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे है। इन शिक्षकों की नियुक्तियां उन शैक्षणिक पदों और जिम्मेदारियों के लिए है, जिनकी आवश्यकता महाविद्यालयों में लगातार बनी हुई है। डूटा का कहना है कि संबंधित शिक्षक निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं रखते है और स्थायी शिक्षकों की तरह ही अध्यापन, परीक्षाओं तथा प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारियां निभा रहे है। इसके बावजूद उनकी सेवा की अवधि और भविष्य को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है तथा उन्हें स्थायी शिक्षकों के समान कई सेवा लाभ भी उपलब्ध नहीं हो पाते है। डूटा सचिव प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर ने शिक्षकों की 120 दिन की नियुक्ति के बाद एक दिन का औपचारिक अंतर देकर दोबारा नियुक्त किए जाने की व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की। डूटा के अनुसार, जब शिक्षकों का कार्य लगातार और स्थायी प्रकृति का है, तब बार-बार छोटी अवधि की नियुक्तियां शिक्षकों में पेशेवर असुरक्षा पैदा करती है और महाविद्यालयों की शैक्षणिक स्थिरता को भी प्रभावित करती है। संगठन का कहना है कि वर्षों तक इस प्रकार की नियुक्ति व्यवस्था जारी रहने से शिक्षकों के साथ-साथ संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
डूटा ने अपने ज्ञापन में दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार से संयुक्त रूप से ऐसी स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसके माध्यम से पात्र और लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए एक साथ नियमितीकरण एवं समायोजन की प्रक्रिया शुरू की जा सके। संगठन ने आरक्षित पदों, लंबित पदों तथा रिक्तियों से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने की मांग भी रखी है। डूटा का कहना है कि जिन शैक्षणिक जिम्मेदारियों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है, उन्हें निभाने के लिए स्थायी और सुरक्षित शिक्षक व्यवस्था आवश्यक है। डूटा ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे पात्र शिक्षकों के मामले में तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से चली आ रही अस्थायी नियुक्ति व्यवस्था का समाधान हो सके। संगठन ने शिक्षकों के सम्मान, सेवा-सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन तथा दिल्ली सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। न्याय मार्च के माध्यम से शिक्षकों ने यह संदेश दिया कि लंबे समय से लंबित नियमितीकरण के मुद्दे का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रक्रिया और समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।
