भारतीय संस्कृति सभा, पीजीडीएवी महाविद्यालय (प्रातः), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली व गुरुकुल कांगड़ी (सम विश्वविद्यालय) हरिद्वार, उत्तराखंड ने दिनांक 29 सितंबर, 2026 को एक दिवसीय संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन पुराना संगोष्ठी कक्ष में किया। संगोष्ठी का विषय, ‘भारतीय संस्कृति और आज का युवा’ था ।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वल व सरस्वती वंदना से हुआ। भारतीय संस्कृति सभा के संयोजक डॉ रामवीर सिंह ने अतिथियों व विद्यार्थियों का स्वागत कर संगोष्ठी की भूमिका से श्रोताओं को अवगत कराया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर दरविंदर कुमार ने युवाओं को भारतीय संस्कृति से सीखने और आत्मसात कर समाज व मानवता का कल्याण करने की प्रेरणा दी। मुख्य वक्ता श्रीमान विनय आर्य, सचिव, आर्य प्रतिनिधि सभा, दिल्ली ने कहां, भारतीय संस्कृति सबसे प्राचीन है। हमारी संस्कृति अपने आप में संपूर्ण है। भारतीय संस्कृति के प्राचीन काल गणना के केन्द्रों को प्रकाशित किया। युवाओं से आग्रह किया आप आगे बढ़कर भारतीय संस्कृति को समझे, जाने और नवाचार के इस युग में संस्कृति को संजोकर आगामी पीढ़ी को विरासत में सौंपे।
दूसरे वक्त प्रोफेसर सुधीर कुमार आर्य, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने प्रकृति, संस्कार और आज की जीवन शैली पर प्रकाश डालते हुए। आज की युवा शक्ति को पांच तत्वों जैसे -आकाश, पृथ्वी, वायु, जल और अग्नि को साफ, सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हम युवाओं की है। स्वच्छता अभियान को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए उन्होंने कहां भारत की जनसंख्या 140 करोड़ है, यदि हर नागरिक 25 फुट भूमि को साफ रखने की जिम्मेदारी ले तो 30 मिनट में भारत देश में हर स्थान साफ सुथरा नजर आएगा।
पीजीडीएवी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर दरविंदर कुमार व गुरुकुल कांगड़ी (सम विश्वविद्यालय) की कुलपति प्रोफेसर प्रतिमा मेहता लोथर ने भारतीय संस्कृति सभा के साथ संयुक्त कार्यक्रम की अनुमति देकर दोनों संस्थाओं ने भारतीय संस्कृति को पोषित व युवाओं के लिए प्रेरणादायक व रचनात्मक कार्य किया है। कार्यक्रम का समापन अतिथियों, वक्ताओं, श्रोताओं, शिक्षकों आर्य चैनल, कार्यक्रम के आयोजकों, कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका में रहे विद्यार्थियों व दोनों संस्थाओं के मुखियाओं का डॉक्टर विवेक कुमार दुबे ने अनन्त आभार व हृदय कि गहराई से असीम धन्यवाद के साथ किया।।
