यश पांडेय
बाहुबली विधायक अनंत सिंह की राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में अपने ‘9 मर्डर’ वाले बयान को लेकर सुर्खियों में आए मोकामा के जदयू (JDU) विधायक अनंत सिंह अब चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। इस मामले में उनके साथ पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
घटनाक्रम के अनुसार, जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में रोड शो करने वाले अनंत सिंह के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान कथित नियम उल्लंघन को लेकर बाढ़ और मोकामा थानों में कुल तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। इन मामलों में अनंत सिंह, अनुज सिंह और अन्य संबंधित लोगों के नाम शामिल हैं। बाढ़ थाने में दो और मोकामा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
इस कार्रवाई की मुख्य वजह 18 अक्टूबर को निकाला गया रोड शो बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, रोड शो के दौरान अनुमति से अधिक वाहनों का इस्तेमाल किया गया और कई वाहनों में सायरन बजाए गए। इसके अलावा, बाढ़ शहर में कई जगहों पर जेसीबी (JCB) मशीनों के जरिए फूलों की बारिश कराई गई। इससे यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की बात भी सामने आई। इन कथित उल्लंघनों के आधार पर प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले की जांच की जा रही है।
इस घटनाक्रम के राजनीतिक मायने भी हैं। अनंत सिंह जदयू के मौजूदा विधायक हैं, जबकि वे पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। इस सीट से जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार भी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के मुकाबले जनसुराज प्रत्याशी का समर्थन करने को लेकर अनंत सिंह की भूमिका चर्चा में है। उनके इस कदम से पार्टी के भीतर राजनीतिक असहजता की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अनंत सिंह हाल ही में अपने ‘9 मर्डर’ वाले बयान को लेकर आलोचनाओं का सामना कर चुके हैं। बाद में उन्होंने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी। अब रोड शो से जुड़े तीन मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां फिर चर्चा में हैं। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना नहीं है। मामले में आगे की स्थिति पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट समेत आठ सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 23 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान कथित नियम उल्लंघन को लेकर हुई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।
