नंदिनी
आईआईटी बॉम्बे में द्वितीय वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद परिसर में छात्रों का विरोध लगातार जारी है घटना के बाद छात्रों ने संस्थान के शुरुआती आधिकारिक बयान पर सवाल उठाए थे छात्रों का आरोप था कि जाँच पूरी होने से पहले ही साहिल पर परीक्षा के दौरान एआई उपकरण के इस्तेमाल से जुड़ी बातें सार्वजनिक कर दी गई, जबकि उस समय पूरे मामले की जाँच जारी थी। छात्रों का कहना है कि किसी छात्र की मौत से जुड़ी संवेदनशील घटना में जाँच पूरी होने से पहले इस तरह की जानकारी सामने रखना उचित नहीं है बढ़ते विरोध के बीच आईआईटी बॉम्बे ने अपने पहले बयान की भाषा पर खेद जताया है संस्थान ने कहा कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में जाँच पूरी होने से पहले घटनाओं का विस्तृत विवरण देना उचित नहीं था। संस्थान की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई जाँच के निष्कर्षों के आधार पर किए जाने की बात कही गई। इसी बीच प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। और यह बताया गया है कि जिस परीक्षा में साहिल शामिल थे, उस दौरान प्रोफेसर डूला निगरानी की जिम्मेदारी में थे। साहिल के परिजनों की शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में भी उनका नाम शामिल है। साहिल के परिवार ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किए जाने के आरोप लगाए है इन आरोपों की भी जाँच की मांग की जा रही है। घटना के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने संस्थान परिसर में धरना और प्रदर्शन किया। छात्रों ने प्रशासन के सामने लगभग 18 मांगें रखी है। इनमें प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ कार्रवाई की मांग प्रमुख है। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों का कहना है कि केवल डीन पद से हटाना पर्याप्त नहीं है और उनके खिलाफ आगे भी कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराने की मांग भी उठाई है, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की स्पष्ट जानकारी सामने आ सके। इस बीच आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे के इस्तीफे को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई थी। संस्थान ने स्पष्ट किया कि निदेशक ने इस्तीफा नहीं दिया है। निदेशक ने छात्रों की ओर से रखे गए मांग-पत्र पर हस्ताक्षर किए है और उनकी मांगों पर काम करने का आश्वासन दिया है। हालांकि छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और मांगों पर ठोस कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। पिछले कई दिनों से छात्र परिसर में लगातार विरोध कर रहे हैं और प्रशासन के साथ बातचीत के प्रयास भी किए गए है। छात्रों की मुख्य मांग है कि पूरे मामले की जाँच पारदर्शी तरीके से हो और दोष या जिम्मेदारी से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ जाँच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए। इस घटना ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव, परीक्षा और अनुशासन से जुड़ी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता तथा जातिगत भेदभाव के आरोपों जैसे गंभीर मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
