यश पांडेय
चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने बिहार और झारखंड में अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे भारी तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। राजधानी रांची समेत दोनों राज्यों के कई प्रमुख शहरों में पिछले 48 घंटों से लगातार मूसलाधार बारिश और बेहद तेज तूफानी हवाओं का खौफनाक दौर जारी है। मौसम के इस अचानक और भयानक बदलाव ने पूरे इलाके को अपनी गहरी गिरफ्त में ले लिया है। काले घने बादलों और तूफानी हवाओं की वजह से दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से बेपटरी हो गया है। लोग दहशत के साये में अपने-अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं और बाजारों से लेकर दफ्तरों तक में सन्नाटा पसरा हुआ है।
इस भयंकर तूफान और तेज हवाओं के कहर का सीधा अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार 80 से अधिक स्थानों पर वर्षों पुराने और विशालकाय पेड़ जड़ों से उखड़कर धराशायी हो चुके हैं। इसके साथ ही दर्जनों बिजली के पोल भी तूफानी हवाओं के जबरदस्त थपेड़े नहीं सह सके और बीच से टूटकर या झुककर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सड़कों के बीचों-बीच भारी-भरकम पेड़ों और बिजली के खंभों के गिरने से कई नेशनल हाईवे और शहरों के प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। कई जगहों पर पेड़ों के नीचे खड़े वाहनों के दबने की भी खबर है, जिससे संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
शहर के बुनियादी ढांचे पर इस चक्रवात का सबसे व्यापक और बुरा असर पड़ा है। बिजली के पोल गिरने, ट्रांसफार्मर जलने और हाई-टेंशन तार टूटने की वजह से रांची सहित बिहार और झारखंड के कई प्रभावित जिलों में पिछले कई घंटों से ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है। लंबे समय से बिजली गुल रहने के कारण न केवल लोगों के घरों में अंधेरा है, बल्कि इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति, अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं और मोबाइल व इंटरनेट नेटवर्क पर भी पड़ा है। इसके अलावा, लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शहरों की जल निकासी व्यवस्था जवाब दे गई है, जिससे कई निचले इलाकों और रिहायशी कॉलोनियों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं और बारिश का पानी लोगों के घरों में घुसने लगा है।
हालात की बढ़ती गंभीरता और तबाही को देखते हुए राज्य सरकारें तुरंत हरकत में आ गई हैं। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम के साथ-साथ राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों में झोंक दिया गया है। मुख्य मार्गों और रिहायशी कॉलोनियों की सड़कों से गिरे हुए विशालकाय पेड़ों को काटकर हटाने के लिए भारी क्रेन और इलेक्ट्रिक आरी वाली मशीनें लगातार काम कर रही हैं। वहीं, बिजली विभाग के सैकड़ों कर्मचारी और इंजीनियर खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त तारों और खंभों को दुरुस्त करने तथा जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने की जी-तोड़ कोशिशों में जुटे हुए हैं।
मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि चक्रवात ‘अर्नब’ का खतरा अभी टला नहीं है और अगले 24 से 48 घंटों तक इसके प्रभाव के चलते भारी बारिश और तेज तूफानी हवाएं जारी रहने की पूरी आशंका है। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर बिहार और झारखंड की सरकारों और स्थानीय जिला प्रशासन ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर और 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने आम जनता से विशेष अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें, टूटे हुए बिजली के तारों, जलभराव वाले इलाकों, जर्जर इमारतों व पुराने पेड़ों से खुद को दूर रखें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
