यश पांडेय
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ कांड की घटना के बाद अचानक देश की राजधानी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने साहिब सिंह को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रवेश वर्मा द्वारा कथित तौर पर थप्पड़ मारे जाने की वारदात के बाद जिसे एक बेकसूर पीड़ित और आम कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था, उसके अतीत से जुड़ा एक संगीन आपराधिक मामला अब उजागर हो गया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद न केवल इस पूरे विवाद का रुख पूरी तरह से बदल गया है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक जंग में एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ आ गया है।
प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, साहिब सिंह का आपराधिक इतिहास काफी समय से पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है। उसके खिलाफ पश्चिम दिल्ली के तिलक नगर थाने में एक नगर निगम कर्मचारी के साथ मारपीट करने, गाली-गलौज करने और सरकारी काम में बाधा डालने की गंभीर धाराओं के तहत बाकायदा एफआईआर दर्ज की गई थी। यह घटना उस समय घटी जब ऑन-ड्यूटी एमसीडी कर्मचारी अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर रहा था और साहिब सिंह ने उसके साथ हाथापाई की थी। इस पूरे वाकये का सबसे पुख्ता सबूत वहां पास में ही लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया था, जिसमें साहिब सिंह को कर्मचारी पर हमला करते और मारपीट करते हुए साफ तौर पर देखा गया। इसी डिजिटल सबूत के आधार पर पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसा था और फिलहाल साहिब सिंह इस मामले में अदालत से मिली सशर्त जमानत पर बाहर घूम रहा है।
साहिब सिंह की राजनीतिक पहुंच और उसके रसूख की बात करें तो वह आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक जरनैल सिंह का सोशल मीडिया अकाउंट और पूरी डिजिटल टीम संभालता है। पार्टी के शीर्ष नेताओं और मुख्य प्रचार तंत्र से सीधे जुड़े होने के कारण संगठन के भीतर उसका खासा दबदबा और प्रभाव माना जाता है। ऐसे में एक ऐसे व्यक्ति का नाम सार्वजनिक रूप से सामने आना, जो पहले से ही एक सरकारी कर्मचारी पर हमला करने का आरोपी है और जमानत पर बाहर है, आम आदमी पार्टी के लिए बेहद असहज करने वाली स्थिति पैदा कर रहा है। विरोधी दल इस बात को लेकर आक्रामक हो गए हैं कि कैसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को पार्टी के भीतर अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।
प्रवेश वर्मा से जुड़ी हालिया घटना के बाद जहां एक ओर साहिब सिंह और आम आदमी पार्टी खुद को पूरी तरह से पीड़ित बताकर मंत्री के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और इस्तीफे की मांग को लेकर हमलावर रुख अपनाए हुए थे, वहीं दूसरी ओर इस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के बाहर आने से पूरे मामले का नैतिक और कानूनी संतुलन बदल गया है। कानून के जानकारों का मानना है कि जमानत पर बाहर चल रहे किसी भी व्यक्ति द्वारा नए विवादों में शामिल होने या कानून-व्यवस्था की स्थिति से जुड़ने पर उसकी जमानत रद्द करने की समीक्षा भी की जा सकती है। इस नए तथ्य के सामने आने के बाद अब तिलक नगर थाना पुलिस और जांच एजेंसियां साहिब सिंह की जमानत की शर्तों और उसकी मौजूदा गतिविधियों की नए सिरे से जांच कर सकती हैं।
इस बड़े और अहम खुलासे के बाद दिल्ली का राजनीतिक तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और दोनों ही प्रमुख दलों के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने और मंत्री प्रवेश वर्मा के कथित कृत्य से ध्यान भटकाने की साजिश करार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी इसे ‘आप’ नेताओं के दोहरे चरित्र और आपराधिक तत्वों को दिए जाने वाले राजनीतिक संरक्षण का प्रत्यक्ष प्रमाण बताकर हमला बोल रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि दिल्ली की राजनीति में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमाने वाला है।
