डॉ सत्य प्रकाश तिवारी

देश में बच्चों की मानसिक स्थिति, निजता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए ऐसे कड़े नियम और कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार करे, जिससे 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों के स्वतंत्र सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह भी उजागर किया गया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे कानूनन कोई संविदा या एग्रीमेंट करने के योग्य नहीं होते, इसके बावजूद दिग्गज टेक कंपनियां महज एक चेकबॉक्स क्लिक करवाकर उनसे नियम-शर्तें स्वीकार करा लेती हैं। कोर्ट ने कहा कि भारतीय अनुबंध अधिनियम के तहत नाबालिगों द्वारा की गई ऐसी सहमतियां कानूनन अमान्य होती हैं, इसलिए टेक कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर और आयु-सत्यापन प्रणाली में बदलाव करने ही होंगे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों की अबाध पहुंच से पैदा होने वाले खतरों जैसे—साइबर बुलिंग, डेटा की चोरी, हिंसक व अश्लील सामग्री तक पहुंच और स्क्रीन एडिक्शन जैसी समस्याओं पर गहरी चिंता जताई। इस गंभीर खतरे से बच्चों को बचाने के लिए शीर्ष अदालत ने पेरेंटल कंट्रोल की व्यवस्था पर विशेष बल दिया। पीठ ने सुझाव दिया कि यदि एक निश्चित आयु वर्ग के बाद बच्चों को सोशल मीडिया उपयोग की इजाजत दी भी जाती है, तो वह पूरी तरह से उनके माता-पिता या अभिभावकों की लिखित सहमति और सीधी निगरानी के तहत ही होनी चाहिए। इसके अलावा, बिना ठोस ई-केवाईसी या सत्यापित एज-वेरिफिकेशन व्यवस्था के किसी भी नाबालिग को सोशल मीडिया पर स्वतंत्र रूप से सक्रिय रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अदालत ने जोर देकर कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियम के तहत केंद्र सरकार के पास यह पूरा अधिकार और शक्ति है कि वह इन वैश्विक इंटरमीडियरीज़ और सोशल मीडिया कंपनियों को सख्त निर्देश जारी करे। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार बच्चों के ऑनलाइन संरक्षण की दिशा में पूरी तरह सजग है और इस विषय पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार जल्द ही मध्यस्थ नियमों में उपयुक्त संशोधन और नया रेगुलेटरी ढांचा तैयार करने पर काम कर रही है, ताकि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट्स बनाने पर रोक लगाया जा सके और उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त डिजिटल माहौल प्रदान किया जा सके।

By नवप्रभा टाइम्स

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