यश पांडेय
अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले दान और चढ़ावे की चोरी के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच टीम की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान SIT की स्टेटस रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि मंदिर परिसर में दान गिनती वाले कमरे के सीसीटीवी कैमरों की गहनता से की गई जांच में नकदी हटाने और उसे चोरी-छिपे गायब करने की कम से कम 105 अलग-अलग घटनाएं दर्ज पाई गई हैं। इन फुटेज के आधार पर जांच एजेंसियों को ठोस साक्ष्य मिलने की बात कही गई है, जो इस ओर इशारा करते हैं कि चढ़ावा गिनती और प्रबंधन के दौरान नकदी की हेराफेरी की जा रही थी। इस गंभीर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह आगामी 25 सितंबर तक अपनी चार्जशीट दाखिल कर देगी। पहली गिरफ्तारी से 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है, और इससे पहले चार्जशीट न आने पर आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिल सकती है।
एसआईटी द्वारा शुरू की गई वित्तीय जांच में इस पूरे मामले की परतें और अधिक गहराई से खुलती नजर आ रही हैं। कोर्ट को बताया गया कि आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है। पुलिस के अनुसार छापेमारी में आरोपी अनुकल्प मिश्र के घर से करीब 20 लाख रुपये और लवकुश मिश्र के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जबकि अविनाश शुक्ल के बैंक खाते से 5 लाख रुपये की रिकवरी की गई। अब तक गिरफ्तार आठ आरोपियों से कुल 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। 105 घटनाओं में कुल कितनी रकम गई और हर आरोपी की क्या भूमिका रही, इसका विस्तृत ब्योरा चार्जशीट में सामने आने की उम्मीद है।
हालांकि, नकद राशि में की गई इस कथित हेराफेरी के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और करोड़ों राम भक्तों के लिए एक राहत भरी खबर भी इस जांच रिपोर्ट के जरिए सामने आई है। एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि TCS सॉफ्टवेयर के जरिए बनाई गई 803 कीमती सामानों की रसीदों की पुष्टि की गई है, और ट्रस्ट के रिकॉर्ड व SBI लॉकर में रखे कीमती सामानों की भौतिक जांच भी की गई है। 200 किलो चांदी की ईंटों, 38.288 किलो चांदी, चांदी के हार, चरण पादुका और रामचरितमानस जैसे दान से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों की जांच में भी SIT को कोई गड़बड़ी नहीं मिली। हालांकि जांच में 86 ऐसे कीमती सामान भी सामने आए हैं, जिन्हें कथित तौर पर बिना रसीद के दान किया गया था। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि हेराफेरी का मामला मुख्य रूप से दैनिक आधार पर प्राप्त होने वाले नकद दान की गिनती और प्रबंधन की प्रक्रिया से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया। जब कोर्ट को बताया गया कि 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल हो जाएगी, तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चार्जशीट जरूर दाखिल होनी चाहिए। कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया और संबंधित मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि चार्जशीट पर कानून के अनुसार कार्रवाई करें। चार्जशीट दाखिल होने के बाद निचली अदालत में इस मामले में शामिल प्रत्येक आरोपी की भूमिका पर सुनवाई होगी। करोड़ों राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं और भरोसे से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर देश की सर्वोच्च अदालत की नजर बनी हुई है। चार्जशीट के अदालत के समक्ष आने के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि गड़बड़ी कितनी बड़ी थी और इसमें मंदिर की गिनती व्यवस्था से जुड़े किन-किन कर्मियों की भूमिका रही।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के इस बहुचर्चित और अति-संवेदनशील मामले में अब देश भर की निगाहें चार्जशीट पर टिकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एसआईटी रिपोर्ट की कॉपी देने से इनकार कर दिया और कहा कि वह मामले को सत्र न्यायाधीश के हाथों से नहीं निकालना चाहती, हालांकि जरूरत पड़ने पर जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसमें साक्ष्यों, आरोपियों और उनके खिलाफ दर्ज धाराओं की न्यायिक जांच होगी। अभी किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है।

