- प्रणव कुमार अभय/गोपालगंज
बिहार की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कुचायकोट से बाहुबली विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय के खिलाफ कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया। गोपालगंज की एक अदालत ने विधायक पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और उनके सीए (CA) राहुल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कार्रवाई बेलवा गाँव में जमीन कब्जाने और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोपों के बाद की गई है। जैसे ही वारंट की खबर बाहर आई, पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई और विधायक की गिरफ्तारी के लिए जिले के कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है।
इस पूरे विवाद की जड़ बेलवा गाँव की एक बेशकीमती जमीन बताई जा रही है। आरोप है कि सत्ता के रसूख और बाहुबल के दम पर विधायक और उनके करीबियों ने पीड़ित पक्ष की जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विधायक न केवल सीधे तौर पर जमीन हड़पने में शामिल हैं, बल्कि वे इलाके के कुख्यात भू-माफियाओं को पुलिसिया कार्रवाई से बचाकर उन्हें राजनीतिक संरक्षण भी दे रहे हैं। इस मामले में विधायक के भाई सतीश पांडेय की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसके चलते उन पर भी कानूनी गाज गिरी है।
पुलिस प्रशासन अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। वारंट जारी होते ही विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो विधायक के संभावित ठिकानों और उनके गुप्त ठिकानों पर नजर रख रही हैं। छापेमारी की कार्रवाई से समर्थकों में भारी नाराजगी और तनाव का माहौल है, जबकि कानून के जानकारों का मानना है कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद विधायक की मुश्किलें कम होने वाली नहीं हैं। अगर समय रहते वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी पूरी कर चुकी है। इस घटना ने बिहार की सत्ताधारी पार्टी JDU के ‘सुशासन’ के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले अपने ही विधायक पर इस तरह की सख्त कार्रवाई सरकार की छवि को प्रभावित कर सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस “माननीय” को गिरफ्तार कर पाती है या फिर विधायक कोर्ट से कोई राहत पाने में सफल रहेंगे। फिलहाल, गोपालगंज से लेकर पटना तक इस वारंट और छापेमारी की खबर ने तापमान बढ़ा दिया है।
