प्रणव कुमार दुबे
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजे आते ही बिहार के गोपालगंज जिले में जश्न की एक अद्भुत लहर दौड़ गई है। गोपालगंज के एक छोटे से ग्रामीण इलाके से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे छात्र आदर्श कुमार ने डूसू चुनाव में अपनी प्रतिभा, कड़े परिश्रम और नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाते हुए एक ऐतिहासिक जीत हासिल की है। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में उन्होंने पाठ्यक्रम प्रतिनिधि (कोर्स रिप्रेजेंटेटिव) के पद पर खड़े होकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 250 से भी अधिक मतों के विशाल अंतर से शिकस्त दी। इस शानदार और एकतरफा जीत ने न केवल कैंपस में उनके प्रभाव को स्थापित किया है, बल्कि गोपालगंज से लेकर सोशल मीडिया के तमाम मंचों पर ‘बिहार के लाल’ के नाम की गूंज पैदा कर दी है, जहाँ हर कोई इस युवा नेता की सफलता की सराहना कर रहा है।
आदर्श कुमार का यह सफर किसी संघर्षमयी प्रेरणादायी कहानी से कम नहीं है। वे मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के सुदूर विजयीपुर प्रखंड स्थित चुगड़ी-जगदीशपुर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता मृत्युंजय लाल श्रीवास्तव (जिन्हें क्षेत्र में ‘सोनू लाल श्रीवास्तव’ के नाम से जाना जाता है) स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला मीडिया प्रभारी रह चुके हैं। घर में राजनीतिक और सामाजिक माहौल मिलने के कारण आदर्श में बचपन से ही जनसेवा और नेतृत्व के संस्कार समाहित थे। अपनी शुरुआती शिक्षा गांव और स्थानीय स्कूल से पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा का सपना लेकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय का रुख किया। दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में दाखिला लेते ही उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई में अव्वल स्थान बनाए रखा, बल्कि आम छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं से खुद को जोड़ा और देखते ही देखते कॉलेज में छात्रों के सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद चेहरे बन गए।
इस छात्र संघ चुनाव में आदर्श कुमार ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोकी थी। चुनाव प्रचार के दौर में उन्होंने पारंपरिक नारों से इतर छात्रों के असल जमीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। कैंपस में आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित करने, बेहतर अकादमिक माहौल बनाने, वाई-फाई और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बिहार और अन्य दूर-दराज के राज्यों से आने वाले छात्रों की आवास व फीस संबंधी समस्याओं को उन्होंने अपना मुख्य एजेंडा बनाया। उनके दिन-रात के सघन जनसंपर्क अभियान और सहज स्वभाव ने छात्र-छात्राओं का दिल जीत लिया। जब मतगणना के नतीजे घोषित हुए, तो उन्हें मिले एकतरफा भारी जनादेश ने यह साबित कर दिया कि छात्रों ने उनकी मेहनत, दूरदर्शिता और निष्ठा पर अटूट विश्वास जताया है।
आदर्श कुमार की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर जैसे ही उनके गृह जिले गोपालगंज पहुंची, पूरे विजयीपुर इलाके में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके पैतृक गांव चुगड़ी-जगदीशपुर में ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीण झूम उठे, आतिशबाजी की गई और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाई दी गई। स्थानीय ग्रामीणों, परिजनों और एनडीए कार्यकर्ताओं ने इसे केवल एक व्यक्तिगत या छात्र राजनीति की जीत नहीं, बल्कि पूरे गोपालगंज और बिहार के मान-सम्मान को बढ़ाने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आकर देश के इतने बड़े और अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधि के रूप में अपनी जगह बनाना यह दर्शाता है कि मेहनत और लगन से हर सपना साकार हो सकता है, और यह सफलता क्षेत्र के हजारों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
जीत के आधिकारिक ऐलान के बाद कैंपस में आदर्श कुमार का ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ समर्थकों द्वारा अभूतपूर्व और जोरदार स्वागत किया गया। इस भावुक क्षण में मीडिया और छात्रों से बात करते हुए आदर्श कुमार ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद, समर्थकों के अटूट विश्वास, शिक्षकों के मार्गदर्शन और ABVP के नेतृत्व को दिया। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और विनम्रता के साथ कहा कि यह जीत उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि कॉलेज के हर उस छात्र की जीत है जो बदलाव और बेहतर अकादमिक माहौल की उम्मीद रखता है। उन्होंने संकल्प लिया कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में वे बिना किसी भेदभाव के हर छात्र की समस्या को विश्वविद्यालय प्रशासन और शीर्ष अधिकारियों के समक्ष पूरी मजबूती से उठाएंगे और छात्र हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
