यश पांडेय
महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के उच्च मानकों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। कड़क, बेबाक और अनुशासनप्रिय छवि के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे की अगुवाई में चल रहे राज्यव्यापी अभियान के तहत दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित बहुचर्चित, ऐतिहासिक और दशकों पुराने ‘ओलंपिया कॉफी हाउस’ का लाइसेंस 17 सितंबर को निलंबित कर दिया गया है। एफडीए के इस कड़े कदम से मुंबई ही नहीं व्यापारिक व पर्यटन केंद्रों में बल्कि संपूर्ण महाराष्ट्र के होटल, रेस्टोरेंट और कैफे उद्योग में एक तीव्र हड़कंप पैदा कर दिया है, क्योंकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनस्वास्थ्य और स्वच्छता के बुनियादी सिद्धांतों से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
इस समूचे प्रशासनिक एक्शन का घटनाक्रम एक सजग, सतर्क और जागरूक नागरिक द्वारा एफडीए के समक्ष दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता ने उक्त प्रतिष्ठान में परोसी जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भोजन तैयार करने की शैली और परिसर में फैली अस्वच्छता को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की थी। सामान्यतः प्रशासनिक लालफीताशाही में दब जाने वाली ऐसी शिकायतों पर इस बार एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंढे ने बिना किसी विलंब के त्वरित और सख्त संज्ञान लिया। उन्होंने तुरंत प्रभाव से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया और उन्हें किसी भी बाहरी दबाव या प्रभाव को नजरअंदाज करते हुए स्थल पर जाकर पूरी पारदर्शिता के साथ भौतिक सत्यापन और विस्तृत जांच करने के कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
आयुक्त के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए एफडीए अधिकारियों की इस विशेष टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना, चेतावनी या भनक के कोलाबा स्थित ‘ओलंपिया कॉफी हाउस’ में औचक छापेमारी और सघन निरीक्षण प्रक्रिया को अंजाम दिया। जांच अधिकारी जब रेस्टोरेंट के आंतरिक कमरों, विशेष रूप से मुख्य रसोईघर और खाद्य सामग्री भंडारण कक्ष के भीतर दाखिल हुए, तो वहां का दृश्य अत्यंत चिंताजनक और अस्वास्थ्यकर पाया गया। विस्तृत निरीक्षण के दौरान यह उजागर हुआ कि जिस स्थान पर रोजाना सैकड़ों ग्राहकों के लिए भोजन पकाया जाता है, वहां स्वच्छता नियमों की घोर अवहेलना की जा रही थी। रसोईघर में जमा मैल और चिकनाई, असुरक्षित व अमानक तापमान पर रखी खाद्य सामग्रियां, वेंटिलेशन की कमी और कीट नियंत्रण की अनुपस्थिति जैसी कई अक्षम्य तकनीकी और व्यावहारिक कमियां पाई गईं।
दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके कोलाबा में स्थित ‘ओलंपिया कॉफी हाउस’ केवल एक आम रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि यह मुंबई शहर की पारंपरिक खान-पान संस्कृति और इतिहास का एक प्रमुख हिस्सा माना जाता रहा है। दशकों पुराने इस लोकप्रिय आउटलेट पर प्रतिदिन स्थानीय निवासियों, पास के दफ्तरों के अधिकारियों, देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और शौकीनों का भारी जमावड़ा रहता है। इतने नामचीन और व्यापक रूप से पसंद किए जाने वाले प्रतिष्ठान में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत तय बुनियादी हाइजीन और स्टोरेज मानकों का ऐसा खुला उल्लंघन मिलने से जांच दल भी स्तब्ध रह गया। इसके बावजूद, एफडीए ने यह संदेश स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि किसी प्रतिष्ठान का इतिहास, लोकप्रियता या ब्रांड वैल्यू चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, जब बात आम जनता की सेहत की आती है तो कानून सबके लिए बराबर है।
कोलाबा के ओलंपिया कॉफी हाउस पर किया गया यह लाइसेंस निलंबन कोई अलग-थलग या छिटपुट दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह राज्यभर में खाद्य प्रतिष्ठानों की मनमानी रोकने के लिए चलाए जा रहे एक आक्रामक और व्यापक निरीक्षण अभियान का हिस्सा है। एफडीए द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित कुल 27 बड़े और प्रतिष्ठित फूड एस्टेब्लिशमेंट्स का अचानक भौतिक ऑडिट और सूक्ष्म परीक्षण किया गया था। इस राज्यव्यापी जांच पड़ताल के दौरान नियमों का गंभीर और अक्षम्य उल्लंघन पाए जाने पर एफडीए ने अत्यंत कठोर रुख अपनाते हुए 27 में से 14 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिए, जिससे यह साफ होता है कि यह कार्रवाई किसी एक प्रतिष्ठान तक सीमित न होकर पूरे तंत्र की सफाई के उद्देश्य से की गई है।
इस पूरे व्यापक अभियान का नेतृत्व कर रहे एफडीए प्रमुख व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे अपनी त्वरित निर्णय क्षमता, सख्त अनुशासन और लापरवाही के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के लिए जाने जाते हैं। विभाग का पदभार संभालते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ, शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना केवल एक सेवा नहीं बल्कि नागरिकों का मौलिक अधिकार है। तुकाराम मुंढे के कड़े निर्देशों के बाद राज्यभर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमें पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ चुकी हैं और दिन-रात होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और ढाबों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि निरीक्षण की यह रफ्तार न केवल बनी रहेगी बल्कि आने वाले दिनों में और अधिक सघन होगी।
एफडीए की इस ताबड़तोड़ और पारदर्शी कार्रवाई का व्यापक प्रभाव पूरे महाराष्ट्र के होटल, रेस्टोरेंट और कैफे व्यवसाय पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। दशकों पुराने और बहुचर्चित ओलंपिया कॉफी हाउस का लाइसेंस सस्पेंड होने की खबर फैलते ही राज्यभर के होटल व्यवसायियों में खौफ का माहौल है और कई बड़े संघों ने अपने सदस्यों को स्वच्छता मानकों का तुरंत अनुपालन करने के निर्देश जारी किए हैं। कार्रवाई के डर से छोटे-बड़े रेस्टोरेंट संचालकों ने आनन-फानन में अपने किचन, फूड स्टोरेज एरिया, डीप फ्रीजर और हाइजीन तंत्र का आंतरिक ऑडिट कराना और बड़े पैमाने पर पेस्ट कंट्रोल व सफाई अभियान शुरू कर दिया है, ताकि एफडीए की अचानक होने वाली जांच में उन पर कोई गाज न गिरे।
वहीं दूसरी ओर, आम जनता, ग्राहक अधिकार संगठनों और नागरिक समाज ने आईएएस तुकाराम मुंढे की इस निर्भीक और जनहितैषी कार्रवाई का खुलकर समर्थन और स्वागत किया है। आम नागरिकों का मानना है कि व्यावसायिक लाभ कमाने की अंधी दौड़ में ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले प्रतिष्ठानों पर ऐसी ही कठोर और समझौताहीन कार्रवाई की जरूरत थी। एफडीए प्रशासन ने भी राज्य के सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि वे किचन की स्वच्छता, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और कर्मचारियों के स्वास्थ्य मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा दोषी पाए जाने वाले संस्थानों का लाइसेंस न केवल निलंबित किया जाएगा बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर हमेशा के लिए संस्थान को सील कर दिया जाएगा।
