यश पांडेय

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी महीनों लंबी यात्रा को विराम देते हुए आधिकारिक वापसी की दहलीज पर आ खड़ा हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए नवीनतम बुलेटिन और अत्याधुनिक उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के शुष्क एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से मॉनसून की वापसी की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है। सामान्यतः सितंबर के मध्य के बाद थार के मरुस्थलीय इलाकों में मानसूनी हवाओं का प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं अपनी जगह बनाने लगती हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश के भू-भाग से नमी वाले बादलों का कारवां अब धीरे-धीरे पीछे हटने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि मॉनसून की वापसी की प्रक्रिया का आगाज होने का अर्थ यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि देश भर में बारिश का दौर अचानक पूरी तरह थम जाएगा या मौसम एकदम शुष्क हो जाएगा। वास्तव में, मॉनसून की विदाई का यह शुरुआती संक्रमण काल अत्यंत अस्थिर, संवेदनशील और मौसमी हलचलों से भरपूर होता है। इस चरण में वायुमंडल के निचले स्तरों में पहले से मौजूद प्रचुर नमी और दिन के समय बढ़ने वाले तापमान के परस्पर प्रभाव से स्थानीय स्तर पर कपासी बादलों का निर्माण होता है, जिसके चलते देश के कई बड़े राज्यों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बादलों की भीषण गड़गड़ाहट, तेज आंधी और झमाझम मूसलाधार बारिश का दौर पूरी आक्रामकता के साथ जारी रहने वाला है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और इसके आसपास के प्रमुख शहरों जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए अलर्ट जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली-NCR के आसमान में घने काले बादलों का विशाल जमावड़ा बना रहेगा और इस दौरान विभिन्न इलाकों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर तीव्र बारिश के दौर देखने को मिलेंगे। बारिश के साथ-साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली तूफानी हवाएं मौसम में ठंडक घोलेंगी, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन व्यस्त सड़कों पर भारी जलभराव और यातायात के बाधित होने की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के मौसमी परिदृश्य में भी बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही अंचलों के दर्जनों जिलों में मूसलाधार बारिश, अंधड़ और वज्रपात का यलो व ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी यूपी के मेरठ, सहारनपुर, अलीगढ़ और आगरा से लेकर पूर्वी यूपी के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बस्ती और प्रयागराज जैसे प्रमुख जिलों में मध्यम से भारी वर्षा होने का अनुमान है। इस दौरान आकाशीय बिजली चमकने और बादलों के अत्यधिक गरजने की चेतावनी दी गई है, जिसको ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता को बारिश के दौरान खुले मैदानों, जलभराव वाले क्षेत्रों, मोबाइल टावरों और ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त एडवाइजरी जारी की है।

बिहार के परिदृश्य में मॉनसून के इस अंतिम चरण की विदाई बारिश काफी व्यापक और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील साबित हो सकती है। मौसम केंद्र के अनुसार, राज्य के उत्तरी, मध्य और पूर्वी जिलों में अगले 3 से 4 दिनों तक मानसूनी बादलों की मेहरबानी लगातार बनी रहेगी और बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेगा। विशेष रूप से नेपाल की तराई से सटे जिलों जैसे कि पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, अररिया, सीतामढ़ी, सुपौल और मधुबनी में अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका जताई गई है। नेपाल के पहाड़ी और भारतीय तराई इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर पुनः तेजी से उफान पर आ सकता है, जिससे निचले ग्रामीण इलाकों में बाढ़ जैसा खतरा फिर मंडराने लगा है।

देश के एक बड़े हिस्से में अचानक तेज हुई इस मानसूनी बारिश और मौसमी उथल-पुथल के पीछे एक साथ कई शक्तिशाली वेदर सिस्टमों की एक ही समय पर सक्रियता को मुख्य कारक माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी-पूर्वी हिस्से में बना एक नया चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) वातावरण में बहुत बड़े पैमाने पर नमी खींच रहा है, जो मध्य भारत के ऊपर स्थित कम दबाव के क्षेत्र को लगातार ताकत प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त, उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपरी वायुमंडल में एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की आंशिक मौजूदगी ने इन मानसूनी हवाओं के साथ मिलकर एक जटिल मौसमी चक्रव्यूह रच दिया है, जिसके संयुक्त प्रभाव से पूरे उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में वर्षा की तीव्रता बढ़ी हुई है।

मॉनसून की विदाई के इस अंतिम पड़ाव पर हो रही लगातार बारिश जहाँ आम नागरिकों को प्रचंड गर्मी और उमस से बड़ी राहत पहुंचा रही है, वहीं दूसरी ओर देश का कृषक समुदाय और कृषि वैज्ञानिक फसलों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। इस समय देश भर में खरीफ मौसम की प्रमुख फसलें जैसे कि धान, मक्का, बाजरा, उड़द, मूंग और तिलहन खेतों में पककर पूरी तरह तैयार खड़ी हैं या फिर कटाई के बेहद करीब पहुँच चुकी हैं। ऐसे नाजुक समय में तेज हवाओं के साथ गिरने वाला पानी पकी हुई फसलों को खेतों में बिछा सकता है और कटी हुई फसलों में सड़ांध पैदा कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फिलहाल अपनी फसलों की कटाई रोक दें तथा खेतों में पानी के ठहराव को रोकने के लिए जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करें।

कुल मिलाकर देखें तो भले ही 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान की सरहद से मॉनसून के हटने का आधिकारिक और भौगोलिक काउंटडाउन शुरू हो रहा हो, लेकिन देश के अधिकांश मैदानी और पूर्वी राज्यों में इसका असर इस पूरे सप्ताह तक देखने को मिलता रहेगा। मौसम विभाग ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी प्रांतीय सरकारों, स्थानीय निकायों, यातायात विभागों और राज्य आपदा मोचन बलों (SDRF) को पूरी तरह सतर्क रहने का निर्देश दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह के आते-आते वायुमंडल में स्थायित्व आएगा, जिससे धीरे-धीरे आसमान साफ होगा और देशवासी इस मानसूनी बारिश को अलविदा कहते हुए हल्की गुलाबी ठंड की ओर कदम बढ़ाएंगे।

By नवप्रभा टाइम्स

*नवप्रभा टाइम्स ख़बरें की दुनिया एक भारत में विस्तार के लिए सदैव तत्पर है, बिहार व उत्तर प्रदेश से आधारित समाचार और समसामयिकी चैनल है।[1] अपने भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं पर एक अद्यतन प्रदान करता है।[2] यह सेवा ऑनलाइन और इसके मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रसारित की जाती है। यह 15 जून 2020 से सेवा प्रदान किया जा रहा है। न्यूज़ पोर्टल न्यूज़ चैनल, व राजनीतिक साक्षात्कार, सामाजिक साक्षात्कार, के माननीय दर्शक हमारे ग्राहक है।‌ हमारा कौशल विविध भारतीय भाषाओं में त्वरित गति से खबर देने के लिए सदैव गतिशील है। साप्ताहिक साक्षात्कार के साथ साथ सामाजिक सेवा प्रसारण के उद्देश्य को प्रकाशित करने हेतु हमारे चैनल सर्विस प्रदान कर रहे इस दृष्टि से यह संस्था भारतीय भाषाओं की आवाज बन रही हैं।पत्रकारीय मूल्यों के साथ-साथ लोकतंत्र को परिष्कृत करने में भी हमने यथासंभव अपनी भूमिका निभाई है। करोना काल के दिनों में मानव रक्षा के लिए समाचार की जो भूमिका रही है, वह हमारा स्वर्णिम इतिहास है। निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के चलते नवप्रभा टाइम्स समाचार सत्ता प्रतिष्ठान का कोपभाजक बनता रहा है लेकिन, हमारा लक्ष्य ‘लोकतंत्र का परिष्कार और पुरस्कार’ रहा है।* सौजन्य: नवप्रभा टाइम्स जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed