प्रणव कुमार अभय
संविधान क्लब ऑफ इंडिया के स्पीकर हॉल में लेखक विनोद जौहरी की पुस्तक ‘द यूनाइटेड नेशंस रोल इन कश्मीर’ का विमोचन किया गया। पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है। लेखक के अनुसार पुस्तक में कश्मीर मुद्दे में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, ऐतिहासिक घटनाक्रम और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने कश्मीर के भारत में विलय को लेकर महाराजा हरि सिंह पर थोपी गई जनमत संग्रह की शर्तों के साथ विलय की परतों को खोलने और ऐसे विलय की कानूनी और संवैधानिक वैधता की समीक्षा की है। उन्होंने अनुभव-आधारित और निष्पक्ष विश्लेषण के साथ विलय, जनमत-संग्रह, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उसकी विफलता जैसे गहरे और मूलभूत विषयों की विवेचना की है। हिंद महासागर में संवेदनशील क्षेत्रों में ब्रिटेन और अमेरिका के हितों को साधने के लिए, शीत युद्ध के साये में भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान का गठन हुआ। लद्दाख का क्षेत्र चीन के अधिकार में देकर पाकिस्तान ने भारत के मुकाबले चीन का वर्चस्व स्थापित किया। संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर मुद्दे पर अपनी कार्यवाही में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया और भारत के प्रति सदा पक्षपाती रवैया अपनाया। संयुक्त राष्ट्र संघ बार बार असफल हुआ। परंतु इसने चीन से भारत के लिए सुरक्षा संबंधी खतरे सदा के लिए खड़े कर दिए। अमेरिका-ब्रिटेन ने उसके बाद भी पाकिस्तान का साथ दिया।
कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने के लिए, ब्रिटेन, अमेरिका और चीन की भूमिकाओं के साथ-साथ उस समय के भू-राजनीतिक हालात को एक ही पुस्तक में समेटना आवश्यक था।
कार्यक्रम में श्री सुशील चंद्रा, हिमालिनी प्रभात, विजय सिंघल, ब्रिगेडियर बृजेश पांडेय (सेवानिवृत्त), प्रोफेसर निर्मल जिंदल और श्री आशुतोष जी सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।
इस दौरान पुस्तक के लेखक विनोद जौहरी ने किताब के विषय और उसके लेखन के उद्देश्य पर चर्चा की। कार्यक्रम में पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया गया, जिसमें कश्मीर और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम के अंत में हाई-टी का आयोजन किया गया।
