डॉ सत्य प्रकाश तिवारी
नेपाल के पहाड़ी, तराई और व्यापक जल-ग्रहण क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से हो रही अनवरत और मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर पूरे उत्तर बिहार को खौफजदा कर दिया है, क्योंकि वहां से आने वाला अथाह जलप्रवाह सीधे बिहार की नदियों में तबाही मचाने लगता है। पड़ोसी देश में प्रकृति के इस रौद्र रूप के कारण राज्य की जीवनदायिनी लेकिन बाढ़ के समय अभिशाप बन जाने वाली प्रमुख नदियों—विशेषकर गंडक और कोसी—के जलस्तर में बेहद अप्रत्याशित, खतरनाक और तीव्र वृद्धि दर्ज की जा रही है। इन दोनों ही नदियों का जलप्रवाह तेजी से खतरे के निशान को पार करने की ओर अग्रसर है, जिसके कारण मैदानी और निचले इलाकों में कभी भी बाढ़ की भयावह और प्रलयंकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उत्तर बिहार के लाखों लोगों के सिर पर मंडराते इस आसन्न संकट और संभावित भीषण तबाही की गंभीरता को समय रहते भांपते हुए, बिहार सरकार का आपदा प्रबंधन विभाग, जल संसाधन विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह से ‘हाई अलर्ट’ मोड पर आ गया है, तथा राज्य के सभी सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में आपातकालीन चेतावनी जारी करते हुए राहत और बचाव की पूर्व-तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं।
जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा जारी की गई नवीनतम आधिकारिक रिपोर्ट और बाढ़ के पूर्वानुमान के अनुसार, नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से अनियंत्रित होकर आ रहे पानी के भारी दबाव के चलते वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज और वीरपुर स्थित कोसी बैराज से लाखों क्यूसेक रिकॉर्ड मात्रा में जलप्रवाह (वाटर डिस्चार्ज) होने की प्रबल और खौफनाक संभावना है। बैराजों पर पानी के इस अचानक आए विकराल दबाव और जलस्तर की अनियंत्रित गति को देखते हुए, गोपालगंज जिले में प्रशासन ने किसी भी संभावित त्रासदी से बचने के लिए आधिकारिक तौर पर ‘रेड अलर्ट’ घोषित कर दिया है। गोपालगंज और इसके आसपास के नदी किनारे बसे निचले और बाढ़-प्रवण इलाकों में रहने वाले लाखों ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा गांव-गांव में लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार मुनादी करवाई जा रही है। सभी निवासियों को स्थिति की नजाकत समझाते हुए उन्हें जल्द से जल्द अपने मवेशियों और जरूरी सामानों के साथ ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों, राहत शिविरों या पक्के सरकारी भवनों में शरण लेने की सख्त हिदायत दी गई है, ताकि आधी रात या अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में किसी भी तरह के जान-माल के भारी और अपूरणीय नुकसान से पूरी तरह बचा जा सके।
बाढ़ के इस मंडराते विकराल खतरे के बीच राज्य सरकार ने पटना स्थित पुलिस और प्रशासनिक मुख्यालय से लेकर संबंधित जिलों के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जल संसाधन विभाग के आला अधिकारियों को किसी भी विकट आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे पूरी तरह मुस्तैद रहने का अत्यंत कड़ा और स्पष्ट निर्देश दिया है। सरकार के आदेशानुसार, विशेष रूप से गंडक और कोसी नदियों के किनारे दशकों पहले बने सभी संवेदनशील, अति-संवेदनशील और कमजोर तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे की सघन गश्त और त्रिस्तरीय निगरानी की पुख्ता व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। तटबंधों पर पानी के भारी और तेज दबाव से होने वाले संभावित कटाव, रिसाव या किसी भी छोटी दरार को तुरंत रोकने के लिए जल संसाधन विभाग के अनुभवी अभियंताओं (इंजीनियरों) और तकनीकी विशेषज्ञों की कई विशेष टीमें दिन-रात मोर्चे पर तैनात कर दी गई हैं। इसके अलावा, किसी भी आपात स्थिति में तटबंधों की तुरंत मरम्मत का कार्य शुरू करने के लिए लाखों की संख्या में बालू की बोरियां, नायलॉन क्रेट, जियो-बैग्स, बोल्डर, बांस-बल्ले और अन्य सभी आवश्यक कटाव निरोधी सामग्रियों का विशाल भंडारण तटबंधों के बिल्कुल निकट ही सुरक्षित कर लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर एक पल की भी देरी न हो।
गंडक और कोसी नदियों के इस खौफनाक और डरावने उफान का सीधा और विनाशकारी असर केवल गोपालगंज जिले तक ही सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसके कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया और खगड़िया जैसे कई अन्य निचले और सीमावर्ती जिलों के सैकड़ों गांवों में भी बाढ़ का पानी तेजी से घुसने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस व्यापक खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की कई प्रशिक्षित कंपनियों को अत्याधुनिक मोटरबोट, गोताखोरों, लाइफ जैकेट और अन्य सभी जीवनरक्षक उपकरणों से लैस कर हाई अलर्ट मोड पर विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी विकट परिस्थिति में बिना एक भी मिनट का समय गंवाए व्यापक पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सके। इसके साथ ही, राज्य स्तर पर पटना में स्थापित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष बैराजों से हर घंटे छोड़े जा रहे पानी के डिस्चार्ज और नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर बनाए हुए है; वहीं प्रशासन ने आम जनता से यह अपील की है कि वे अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें, धैर्य बनाए रखें, और अपनी सुरक्षा के मद्देनजर नदी के घाटों, बांधों या उफनती जलधाराओं के तटीय क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहें।
