राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता और उनके बुनियादी अधिकारों के मुद्दों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की छात्राओं का आक्रोश एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सड़कों पर देखने को मिला। मिरांडा हाउस से शुरू होकर फैकल्टी ऑफ आर्ट्स तक आयोजित ‘हम औरतें आजाद हैं’ में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों की बड़ी संख्या में महिला छात्राओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। हाथों में तख्तियां, सशक्त स्लोगन लिखे पोस्टर और बैनर लिए छात्राओं ने समाज की रूढ़िवादी पितृसत्तात्मक सोच और प्रशासन की लचर सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा और करारा प्रहार किया।
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के हाथों में मौजूद तीखे नारों वाले पोस्टरों ने वहां मौजूद हर शख्स और राहगीरों का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा। विशेष रूप से पीले रंग के बैकग्राउंड पर बने एक पोस्टर ने व्यापक चर्चा बटोरी, जिस पर लाल हाथ के छापे के साथ बेहद कड़े और दोटूक शब्दों में लिखा था— “राजा बेटा सुधार लो, रानी बेटी राज कर लेगी”। इस स्लोगन के माध्यम से प्रदर्शनकारी छात्राओं ने समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं पर पाबंदियां लगाने या उन्हें सतर्क रहने की नसीहत देने के बजाय बेटों की परवरिश और उनके सामाजिक व्यवहार को सुधारने की सख्त जरूरत है, ताकि बेटियों को अपनी आजादी, सुरक्षा और अस्तित्व के लिए बार-बार सड़कों पर न उतरना पड़े।
इस पैदल मार्च में शामिल छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के सार्वजनिक स्थलों पर महिला सुरक्षा को लेकर बनी बुनियादी कमियों और प्रशासनिक अनदेखी को प्रमुखता से उठाया। छात्राओं का कहना था कि नॉर्थ कैंपस और आसपास के रिहायशी इलाकों में शाम ढलते ही स्ट्रीट लाइट्स की भारी कमी के कारण अंधेरा छा जाता है, जिससे छात्राओं को आने-जाने में हमेशा डर और असुरक्षा का माहौल महसूस होता है। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की कमी, देर रात पुलिस गश्त का न होना और परिसर के सुरक्षा तंत्र की सुस्ती को लेकर भी छात्राओं ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की।
‘हम आजाद हैं’ और समानता के बुलंद नारों के साथ आगे बढ़ते हुए छात्राओं ने यह साफ कर दिया कि यह विरोध प्रदर्शन महज किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह हर उस सामाजिक ढाँचे और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ एक वैचारिक क्रांति है जो महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास करती है। छात्राओं की प्रमुख मांगों में परिसरों के आसपास क्रियाशील स्ट्रीट लाइट्स लगाना, सार्वजनिक परिवहन सेवा को सुलभ बनाना, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित करना और गश्त बढ़ाना शामिल था। छात्राओं का यह मार्च यह संदेश देने में सफल रहा कि देश की महिलाओं को केवल कागजी सुरक्षा नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल चाहिए जहां वे बराबरी के साथ खुलकर जी सकें।
