यश पांडेय
बाढ़ की विभीषिका और राहत कार्यों में घोर लापरवाही से आक्रोशित पीड़ितों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। क्षेत्र के दौरे पर निकले स्थानीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल की गाड़ी पर गुस्साए बाढ़ पीड़ितों ने जबरदस्त हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने सांसद के काफिले को चारों तरफ से घेर लिया और देखते ही देखते उनकी गाड़ी पर जमकर गोबर, मिट्टी और कीचड़ फेंकना शुरू कर दिया। इस अचानक हुए उग्र विरोध से मौके पर हड़कंप मच गया और चारों तरफ अफरातफरी का माहौल कायम हो गया। स्थिति इतनी विकराल हो गई कि सांसद की सुरक्षा में तैनात पुलिस जवान और अंगरक्षक ग्रामीणों के उग्र रवैये को देख सहम गए और अपना सिर बचाकर मौके से जान बचाते हुए भागते नजर आए।
यह पूरा विवाद पिछले कई दिनों से क्षेत्र में बने बाढ़ के विकराल हालात और प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही उदासीनता का नतीजा है। इलाके की नदियां उफान पर हैं, जिससे दर्जनों गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और हजारों परिवार बेघर होकर ऊंचे स्थानों व बांधों पर पन्नी डालकर रहने को मजबूर हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनके पास न तो खाने के लिए अनाज बचा है और न ही पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध है। बच्चों के लिए दूध, बीमारों के लिए दवाइयां और सिर छिपाने के लिए तिरपाल तक नसीब नहीं हो रहा है। इतने गंभीर संकट के बावजूद प्रशासन या किसी जनप्रतिनिधि ने समय रहते उनकी सुध नहीं ली, जिससे स्थानीय जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांसद डॉ. संजय जायसवाल जैसे ही अपने काफिले के साथ प्रभावित इलाके की सीमा में पहुंचे, वहां पहले से एकत्र सैकड़ों की संख्या में उग्र ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सांसद अभी अपनी गाड़ी का शीशा नीचे कर लोगों से बात करने की कोशिश ही कर रहे थे कि भीड़ का गुस्सा बेकाबू हो गया। देखते ही देखते महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने सड़क किनारे जमा गोबर और कीचड़ उठाकर सांसद की चमचमाती गाड़ी पर दे मारा। गाड़ी का शीशा और पूरी बॉडी गोबर व कीचड़ से पूरी तरह पट गई। भीड़ में से कुछ लोगों ने गाड़ियों के आगे आकर रास्ता रोकने का भी प्रयास किया, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने शुरुआती दौर में ग्रामीणों को पीछे धकेलने और माहौल शांत कराने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित भीड़ के आक्रामक तेवर देखकर उनके हाथ-पांव फूल गए। चारों तरफ से उड़ते हुए कीचड़, गोबर और पत्थरों के ढेलों के बीच खुद को असुरक्षित पाकर जवान अपनी ड्यूटी छोड़ टोपी तथा हाथों से अपने सिर को ढंकते हुए सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग निकले। सुरक्षा घेरा पूरी तरह ध्वस्त होता देख सांसद के वाहन चालक ने गजब की फुर्ती दिखाई और बेहद सूझबूझ के साथ गाड़ी को रिवर्स करके तेजी से सुरक्षित रास्ते की तरफ भगा ले गया।
सांसद के काफिले पर हुए इस हमले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। भारी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति का जायजा लेने तुरंत मौके पर पहुंचे। फिलहाल पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी अन्य अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं और कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वाले उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, घटना के बाद बैकफुट पर आए प्रशासन ने ग्रामीणों के गुस्से को शांत करने के इरादे से राहत सामग्री और तिरपाल वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने का दावा किया है।
