प्रणव कुमार दुबे
बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच बैकुंठपुर प्रखंड के शीतलपुर इलाके में जमींदारी बांध टूटने के बाद बाढ़ का संकट गहरा गया है। बांध टूटने के बाद गंडक का पानी तेजी से आसपास के निचले इलाकों और कई गांवों में फैल गया, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। पानी के तेज बहाव के कारण कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जरूरत पड़ी है और प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। इस स्थिति ने जहां ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं राहत और बचाव कार्यों तथा तटबंधों की निगरानी को लेकर प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। इसी के साथ जिले में बाढ़ की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
मानवीय संकट के इस दौर में राजनीतिक सरगर्मी तब और बढ़ गई जब बैकुंठपुर के पूर्व राजद विधायक प्रेम शंकर यादव ने प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर सवाल उठाए। राजद नेता ने तटबंध टूटने की घटना के लिए प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया और दावा किया कि बांध में पहले से लीकेज की जानकारी अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सरकार और प्रशासन की राहत व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। इसके साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष के नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में वास्तविक राहत कार्यों पर पर्याप्त ध्यान देने के बजाय कुछ जनप्रतिनिधि कैमरे और सोशल मीडिया के लिए गतिविधियां करने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, ‘रील बनाने’ से जुड़े इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली है, इसलिए इसे राजद नेता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राजद नेता के इन आरोपों के बीच बरौली से जदयू के वर्तमान विधायक मंजीत कुमार सिंह ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और राहत कार्यों को लेकर अपनी सक्रियता दिखाई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विधायक प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थिति की जानकारी ली। जदयू विधायक की ओर से सरकार और प्रशासन द्वारा राहत-बचाव कार्य किए जाने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से भी प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, मूल खबर में विधायक के हवाले से सामुदायिक रसोई, तिरपाल वितरण और विशेष मेडिकल टीमों के संबंध में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है, इसलिए इन्हें निश्चित सरकारी आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
जदयू विधायक मंजीत सिंह ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय राहत और बचाव कार्यों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया और कहा कि प्रशासन तथा संबंधित विभाग राहत कार्यों में लगे हुए हैं। वहीं, प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंध टूटने के बाद मौके पर पहुंचीं और प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील भी की गई है।
बहरहाल, गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और शीतलपुर में बांध टूटने के बाद गोपालगंज में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और इसी के साथ RJD और JDU के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। एक तरफ राजद इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और राहत व्यवस्था की कमी से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रहा है, वहीं जदयू की ओर से प्रशासन और राहत-बचाव व्यवस्था के सक्रिय होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों और प्रतिदावों के बीच वास्तविक स्थिति यह है कि बांध टूटने से कई इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचा है और प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति संभालने में जुटी हैं। ऐसे में प्रभावित ग्रामीणों के लिए सबसे अहम राहत, सुरक्षित निकासी और जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता बनी हुई है।
