प्रणव कुमार दुबे
उत्तर बिहार की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश और वहां से आने वाले पानी के कारण गंडक, कोसी, बागमती और कमला बलान जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाल्मीकिनगर और वीरपुर बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद बिहार के कई निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से प्रभावित जिलों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
गंडक और कोसी समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा समेत कई जिलों में देखने को मिल रहा है। कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, कुछ ग्रामीण सड़कों और संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन की ओर से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर तटबंधों और सुरक्षा संरचनाओं पर दबाव बढ़ गया है। पश्चिमी चंपारण के बगहा अनुमंडल के कुछ संवेदनशील इलाकों में गंडक नदी के बढ़ते दबाव के कारण तटबंध की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं। वहीं, पूर्वी चंपारण के अरेराज क्षेत्र में भी बाढ़ के पानी और नदी के बढ़ते दबाव को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बाढ़ का असर चंपारण समेत उत्तर बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। कई स्थानों पर घरों और खेतों में पानी पहुंचने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने के कारण कुछ गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है। सुरक्षित रहने के लिए लोग ऊंचे स्थानों और सुरक्षित इलाकों की ओर जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बाढ़ की स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। जरूरत के अनुसार नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के माध्यम से प्रभावित लोगों को भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, जल संसाधन विभाग की टीमें संवेदनशील तटबंधों और नदी के किनारों की लगातार निगरानी कर रही हैं तथा जरूरत के अनुसार बचाव और मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में चुनौतियां बनी हुई हैं।
