प्रेम कुमार
नई दिल्ली, 27 जून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आपातकाल के सबक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विचारक एवं लेखक डॉ. राजकुमार माथुर, जननेता डॉ. अरविंद अवस्थी, वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय तथा अनेक बुद्धिजीवी, शोधार्थी और पत्रकार उपस्थित रहे।
वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल देश की आंतरिक सुरक्षा के कारण नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने के लिए लिया गया राजनीतिक निर्णय था। उन्होंने कहा कि उस समय जिन परिस्थितियों का हवाला देकर आपातकाल लगाया गया, वे वास्तविकता से परे थीं। रेलवे कर्मचारियों का आंदोलन समाप्ति की ओर था और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन भी उस स्तर पर नहीं था कि उससे देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो। राय साहब ने कहा कि आपातकाल का वास्तविक कारण इलाहाबाद उच्च न्यायालय का वह ऐतिहासिक निर्णय था, जिसमें इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिलने तक सत्ता में बने रहने के उद्देश्य से लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल की घोषणा का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था और बाद में मंत्रिमंडल से औपचारिक स्वीकृति प्राप्त की गई।
अजय सेतिया ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे कठिन दौर था। उन्होंने बताया कि पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छात्र संगठनों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले अनेक व्यक्तियों की भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और नए तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया है। सेतिया ने कहा कि इस पुस्तक में कई ऐसे दस्तावेज और तथ्य शामिल किए गए हैं, जो पहले व्यापक रूप से सामने नहीं आए थे।
डॉ. राजकुमार माथुर ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे नई पीढ़ी तक तथ्यात्मक रूप में पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इतिहास से सीख लेना समय की आवश्यकता है। लोकतंत्र की रक्षा केवल संवैधानिक व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी होती है।आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों को स्मरण करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अजय सेतिया की पुस्तक ‘आपातकाल : आंदोलन और व्यवस्थागत अंधकार’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकारों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और आपातकाल से जुड़े ऐतिहासिक अनुभवों तथा लोकतंत्र की चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया।
