नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार

एशिया पैसिफिक एसडीजी और सस्टेनेबिलिटी समिट 2026 का आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और ‌ एनवायरमेंटल एंड सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में सफलतापूर्वक किया गया। इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGS) और जलवायु समाधानों को गति देने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी तथा सार्थक प्रयासों को बढ़ावा देना था समिट का विषय ‘पार्टनेरशिप्स फॉर एक्सलेरेटिंग सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट एंड क्लाइमेट सॉल्यूशंस’ रहा, जिसने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों और समन्वित दृष्टिकोण से ही संभव है।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य बताया गया तथा शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं को भी एक साझा मंच प्रदान किया गया। इस अवसर पर ‘सौवेनियर और एब्स्ट्रैक्ट बुक’ का विमोचन किया गया, जिसमें 270 से अधिक शोध पत्र और एब्स्ट्रैक्ट्स शामिल थे, जो विभिन्न तकनीकी सत्रों में चर्चा का केंद्र बने समिट का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करना रहा, जिसमें ‌ प्रो.राज कुमार को एशिया पैसिफिक टोबैको सेसेशन लीडरशिप अवार्ड 2026,‌ पदम् भूषण उमा शंकर पांडे को एशिया पैसिफिक वॉटर कंजर्वेशन लीडरशिप अवार्ड 2026, ‌प्रो. बलराम पाणी को एशिया पैसिफिक एनवायर्नमेंटल एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2026 तथा ‌ ऑटोमोट जैंसेट सॉल्यूशन को एशिया पैसिफिक क्लीन एयर टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। इस समिट में डॉ भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद ने जल संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के सतत विकास को मजबूती ‌देने का संकल्प करते हुए प्राकृतिक की चीजों का सही ढंग से उपयोग करने की सलाह दी तथा यह कहा कि प्रकृति में सबसे बहुमूल्य जल है इसलिए हमें अपने ‌ आवश्यकता अनुसार ही जल का उपयोग करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम में ढाका विश्वविद्यालय, बांग्लादेश के जूलॉजी विभाग की प्रमुख और जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ बांग्लादेश की अध्यक्ष, प्रो. हमीदा खानुम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्रम के मजबूत होने से ही ‌ एक विकसित राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है इसके साथ उपस्थित प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और छात्रों से आह्वान किया कि वे समिट से प्राप्त विचारों को अपने जीवन और कार्यक्षेत्र में लागू करे। ‌जिससे लोगों के विचारों में बदलाव आएगी।

कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित‌ तथा पानी के पहरेदार के नाम से मशहूर उमाशंकर पांडे ने‌ जल के संरक्षण के लिए लोगों को कई सलाह दिए जिससे जल संरक्षण किया जा सकता है उन्होंने बताया कि‌ जो हम अपने दिनचर्या के लिए जल का उपयोग करते है उसमें जो जल बच जाता है उसको पेड़-पौधों में डाल देना चाहिए,जिससे जल का सदुपयोग हो सकेगा और हमारी प्रकृति हरी भरी रहेगी इस आयोजन ने स्पष्ट किया कि एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ पृथ्वी का निर्माण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है तथा यह कार्यक्रम सतत विकास की दिशा में भविष्य की रूपरेखा तैयार करने वाला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। समिट की सफलता का श्रेय आयोजन सचिव ‌ डॉ.जितेंद्र नागर संयोजक प्रो.दीपाली जैन,‌‌ सहसंयोजक प्रो.मोनिका, डॉ.राजबाला गौतम,‌ प्रो.बिजेंद्र कुमार,‌ प्रो.शशि रानी,‌ डॉ.तूलिका ‌ सनाढ्य,‌ प्रो.रिचा, डॉ.अर्चना, डॉ.सीमा,‌ प्रो.ममता, प्रो.पूनम, प्रो.सुजीत कुमार,‌ प्रो.विष्णु, डॉ.तारा, डॉ.मनीष,‌ डॉ‌.अनुज, डॉ.खुशबू,‌ डॉ.आशीष, डॉ.भावना,‌ डॉ सुनीता, ‌रामकुमार, डॉ.श्वेता,‌ डॉ. गुंजन,तथा अन्य संकाय सदस्य शामिल थे, ‌ यह सफलता इनके समर्पित प्रयासों को जाता है उनके नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने अकादमिक जगत और सामाजिक सरोकारों के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण किया।

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