गयाजी आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद सराहनीय, सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रसिद्ध पटना महावीर मंदिर न्यास समिति ने प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के साथ-साथ आम दिनों में भी आने वाले भक्तों की सुविधा और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए गयाजी में ‘विष्णु रसोई’ की भव्य और ऐतिहासिक शुरुआत की है। सनातन परंपरा में गयाजी का स्थान अत्यंत विशिष्ट माना गया है, जहाँ अपने पूर्वजों के पितृदोष निवारण, पिंडदान, तर्पण और भगवान विष्णु के चरणकमलों के दर्शन-पूजन के लिए हर साल देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में तीर्थयात्री पहुंचते हैं। ऐसे में इस अनूठी और पुनीत पहल का मुख्य उद्देश्य मोक्षधाम आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर, वृद्ध और दूर-दराज से आए असहाय लोगों को सम्मानपूर्वक नि:शुल्क और शुद्ध सात्विक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें इस पवित्र धाम में प्रवास के दौरान भोजन और जल के लिए किसी भी प्रकार की चिंता या परेशानी का सामना न करना पड़े।

पटना के प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित महावीर मंदिर न्यास द्वारा संचालित यह विष्णु रसोई पूरी तरह से भगवान विष्णु के धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा में समर्पित की गई है। उल्लेखनीय है कि महावीर मंदिर न्यास समिति लंबे समय से पटना महावीर मंदिर परिसर में ‘राम रसोई’ और अयोध्या धाम में ‘अमावा राम मंदिर’ के माध्यम से प्रतिदिन हजारों-लाखों रामभक्तों को नि:शुल्क, स्वादिष्ट और भरपेट भोजन कराती आ रही है। इसी सफल, पारदर्शी और जनहितैषी मॉडल की तर्ज पर अब गयाजी के पवित्र परिसर में भी ‘विष्णु रसोई’ का विधिवत शुभारंभ किया गया है। इस रसोई के शुरू होने से सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह होगा कि जो श्रद्धालु आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जिन्हें अत्यधिक भीड़भाड़ वाले पितृपक्ष मेले के दौरान महंगे होटलों और भोजनालयों में शुद्ध भोजन ढूंढने में कठिनाई होती है, उन्हें अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। अब वे एक ही छत के नीचे पूरी पवित्रता और आदर-सत्कार के साथ भगवान का प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे, जिससे उनकी तीर्थयात्रा और भी मंगलमय और सुगम बन सकेगी।

विष्णु रसोई के सुचारु संचालन में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य, साफ-सफाई और उनकी गहरी धार्मिक आस्था का विशेष और बारीकी से ध्यान रखा जा रहा है। यहाँ आधुनिक तकनीकों और पारंपरिक पवित्रता के अद्भुत मेल से पूरी तरह से स्वच्छ, निर्मल और आध्यात्मिक माहौल में भोजन पकाया जा रहा है। इसमें शुद्ध देसी घी, रिफाइंड और उच्च गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्रियों का उपयोग करके पूर्ण रूप से सात्विक भोजन तैयार किया जा रहा है, जिसमें लहसुन-प्याज या किसी भी प्रकार के तामसिक तत्वों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। श्रद्धालुओं को परोसे जाने वाले भोजन की समृद्ध थाली में मुख्य रूप से स्वादिष्ट बासमती चावल, पौष्टिक अरहर दाल, ताजी मौसमी सब्जियाँ, फूली हुई पूरी, पापड़, चटनी और शुद्ध देसी घी से बना मिष्ठान जैसी पौष्टिक चीज़ें शामिल रहेंगी। इसके अलावा, रसोई के भवन और विशाल भोजन कक्ष की व्यवस्था को आधुनिक आधारभूत ढांचे के साथ इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि एक ही समय में सैकड़ों की तादाद में लोग बिना किसी अव्यवस्था या धक्का-मुक्की के, बेहद सुगमता, स्वच्छता और सम्मान के साथ कतारबद्ध होकर बैठकर भरपेट प्रसाद ग्रहण कर सकें।

स्थानीय निवासियों, गया पाल पंडा समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दूर-दराज के राज्यों से आए तीर्थयात्रियों ने पटना महावीर मंदिर न्यास की इस निस्वार्थ सेवा भावना, दूरदर्शी कदम और अनुपम पहल की मुक्त कंठ से जमकर सराहना और प्रशंसा की है। विशेष रूप से पितृपक्ष के 15 दिनों के महान अवसर पर, जब गयाजी में तिल रखने की भी जगह नहीं होती और लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के मोक्ष और शांति की कामना लेकर यहाँ जुटते हैं, तब भोजन की ऐसी सुव्यवस्थित, हाइजीनिक और नि:शुल्क व्यवस्था किसी ईश्वरीय वरदान से कम साबित नहीं होगी। इस पुनीत पहल से न केवल गरीब और जरूरतमंद श्रद्धालुओं को आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि यह ऐतिहासिक कदम हमारी सनातन संस्कृति के मूल मंत्र ‘अतिथि देवो भव:’ और ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की महान और जीवंत परंपरा को मजबूत करते हुए पूरे समाज को सेवा भाव की एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान करेगा।

महावीर मंदिर न्यास समिति के पदाधिकारियों और प्रबंधकों का यह दृढ़ संकल्प है कि गयाजी की पवित्र धरती पर आने वाला कोई भी श्रद्धालु, चाहे वह किसी भी वर्ग, जाति या स्थान से संबंध रखता हो, यहाँ से भूखा न लौटे। भविष्य की बढ़ती जरूरतों और श्रद्धालुओं की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए, आने वाले दिनों में विष्णु रसोई के बुनियादी ढांचे, आधुनिक बर्तनों और भोजन पकाने की क्षमता को और अधिक विस्तारित करने की एक व्यापक कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। न्यास का लक्ष्य है कि पितृपक्ष जैसे व्यस्ततम और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले दिनों में भी प्रतिदिन हजारों से लेकर लाखों लोगों को बिना किसी रुकावट के पूरी श्रद्धा के साथ नि:शुल्क भोजन कराया जा सके। कुल मिलाकर, महावीर मंदिर न्यास की इस जनहितैषी, पारदर्शी और विशुद्ध धार्मिक पहल ने गयाजी के धार्मिक पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं के विकास और मानव सेवा के क्षेत्र में एक नया, प्रेरक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सेवा और समर्पण के प्रतीक के रूप में सुनाई देती रहेगी।

By नवप्रभा टाइम्स

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