प्रणव कुमार दुबे

बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और नेपाल के निचले इलाकों से पानी छोड़े जाने के कारण राज्य में बाढ़ की स्थिति बेहद विकराल और गंभीर रूप धारण कर चुकी है। सबसे बड़ा हादसा पश्चिम चंपारण जिले के बगहा प्रखंड अंतर्गत खैरटवा गांव में देखने को मिला, जहां गंडक नदी के भयावह दबाव के कारण सोमवार देर रात प्रसिद्ध चंपारण तटबंध अचानक टूट गया। गंडक नदी का जलस्तर अपने अब तक के उच्चतम रिकॉर्ड स्तर (90.90 मीटर) को पार कर चुका था, जिसके परिणामस्वरूप जल प्रवाह के तीव्र वेग और जल संसाधन विभाग की ओर से किए गए सुरक्षा इंतजामों को धत्ता बताते हुए तटबंध में लगभग 150 फीट से अधिक बड़ा चौड़ा कटाव हो गया। तटबंध के धराशायी होते ही आसपास की दर्जनों पंचायतों और सैकड़ों निचले ग्रामीण इलाकों में नदी का पानी प्रचंड गति से प्रवेश करने लगा, जिससे रात के अंधेरे में ही क्षेत्र में चारों तरफ हाहाकार मच गया।

गंडक के इस रौद्र रूप और मुख्य सुरक्षा तटबंध में आई भीषण दरार के बाद न केवल पश्चिम चंपारण, बल्कि पड़ोसी जिलों पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण में भी व्यापक तबाही और तटीय तबाही की गहरी आशंका मंडराने लगी है। बाढ़ के पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि देखते ही देखते बगहा शहर के कई रिहाइशी इलाकों के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस लाइन, अनुमंडल कार्यालय और बेतिया-वाल्मीकिनगर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई फीट तक पानी बहने लगा। मुख्य सड़कों के जलमग्न हो जाने से उत्तर बिहार के कई महत्वपूर्ण इलाकों का सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है और वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण विराम लग गया है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से रिकॉर्ड मात्रा में लाखों क्यूसेक पानी नदी में लगातार छोड़े जाने के कारण स्थिति प्रति घंटा और अधिक विस्फोटक होती जा रही है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

तटबंध टूटने के तत्काल बाद प्रभावित गांवों—जैसे खैरटवा, चखनी, राजावटिया, मंगलपुर और पतिलार—के हजारों निवासी अपने छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्गों, जरूरी घरेलू सामानों और मवेशियों को समेटकर ऊंचे बांधों, पक्के फ्लाईओवरों और सरकारी स्कूलों की छतों की ओर तेजी से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों में जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के खिलाफ गहरा असंतोष और गुस्सा देखा जा रहा है; ग्रामीणों का आरोप है कि बीते वर्ष भी ठीक इसी संवेदनशील स्थान पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ था, लेकिन विभाग ने समय रहते इसका कोई ठोस या स्थायी निर्माण कराने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति की थी, जिसकी कीमत आज पूरा इलाका भुगत रहा है। गांवों का संपर्क कट जाने से लोग पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं और पेयजल, राशन तथा पशुचारे का भयंकर संकट पैदा हो चुका है।

घटना की आधिकारिक सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं की विशेष तकनीकी टीम और स्थानीय जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे हैं और बालू की बोरियों तथा बोल्डर के सहारे कटाव रोधी कार्य शुरू करके कटाव वाले स्थल की मरम्मत के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि जल संसाधन विभाग का दावा है कि नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश थमने के कारण डिस्चार्ज धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन बगहा-1 और बगहा-2 प्रखंडों के विशाल क्षेत्र में जलभराव के कारण फसलों और पक्के मकानों को भारी नुकसान पहुँचने की संभावना जताई जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की कई अतिरिक्त टीमों को प्रभावित इलाकों में मोटर बोटों के साथ तुरंत तैनात किया गया है ताकि पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और प्रभावितों तक राहत सामग्री और सूखा राशन पहुंचाया जा सके।

By नवप्रभा टाइम्स

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