गोपालगंज में NIA का मेगा सर्च ऑपरेशन: लाल बाबू के घर पर देश-विरोधी साजिश, खतरनाक डिजिटल चैट्स और स्लीपर सेल के कनेक्शन की हो रही है कुण्डली तैयार

अनिक कुमार मिश्रा

बिहार के गोपालगंज जिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी और चौकाने वाली कार्रवाई ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी की यह हाई-प्रोफाइल रेड किसी आम आपराधिक मामले या भ्रष्टाचार से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश की संप्रभुता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को तहस-नहस करने की साजिश रचने वाले तत्वों के खिलाफ एक कड़ा प्रहार है।

गोपालगंज के एक स्थानीय निवासी लाल बाबू के घर पर तड़के सुबह एनआईए के अधिकारियों का अचानक पहुंचना किसी फिल्मी दृश्य जैसा था, जिसने न केवल पड़ोसियों बल्कि पूरे जिले के प्रशासनिक अमले और पुलिस प्रशासन को भी सकते में डाल दिया। इस पूरी कार्रवाई की गोपनीयता इतनी कड़ी थी कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भी इस बात की भनक तब लगी जब केंद्रीय एजेंसी के जवान लाल बाबू के दरवाजे पर पहुंच चुके थे।

केंद्रीय जांच एजेंसी की इस ताबड़तोड़ छापेमारी के केंद्र में कुछ बेहद खतरनाक, आपत्तिजनक और देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़े डिजिटल संदेश, सीक्रेट चैट्स और ऑनलाइन कम्युनिकेशंस बताए जा रहे हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को पिछले काफी समय से इस क्षेत्र से कुछ संदेहास्पद इनपुट्स मिल रहे थे, जिसके बाद लगातार इस बात की मॉनिटरिंग की जा रही थी कि आखिर कौन लोग परदे के पीछे रहकर देश के खिलाफ माहौल तैयार कर रहे हैं।

मौके की नजाकत और मामले की अति-संवेदनशीलता को देखते हुए एनआईए की टीम ने लाल बाबू के पूरे आवास को चारों तरफ से अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है। कानून व्यवस्था की किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मौके पर तैनात किया गया है, ताकि अंदर चल रही जांच में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप न हो सके।

इस मैराथन तलाशी अभियान के दौरान एनआईए की विशेष तकनीकी (Technical) और साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम लाल बाबू के घर से बरामद सभी डिजिटल उपकरणों जैसे कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य स्टोरेज गैजेट्स को खंगालने में जुटी हुई है। प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे संदिग्ध सोशल मीडिया चैट्स, विदेशी नंबर्स और मैसेज मिले हैं, जो सीधे तौर पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और प्रतिबंधित संगठनों की कार्यप्रणाली से मेल खाते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया सूत्रों का यह मानना है कि लाल बाबू का यह मामला सिर्फ गोपालगंज की भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार देश के कई अन्य महानगरों, संवेदनशील राज्यों और संभवतः सीमावर्ती इलाकों तक फैले हो सकते हैं। एजेंसी यह पता लगाने के लिए दिन-रात एक कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कोई बड़ा मॉड्यूल, आतंकी संगठन या कोई विदेशी फंडिंग वाला स्लीपर सेल तो सक्रिय नहीं है, जो देश में अशांति फैलाने की फिराक में था।

गोपालगंज में इस बड़ी केंद्रीय कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि आखिर लाल बाबू के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। इस रेड के बाद से इलाके के अन्य संदिग्ध और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर भी खुफिया तंत्र की पैनी और कड़ी नजरें टिक गई हैं, और किसी भी समय अन्य ठिकानों पर भी गाज गिरने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल, एनआईए की यह गहन और मैराथन रेड आखिरी चरण में पहुंच चुकी है और घर के कोने-कोने में दस्तावेज से लेकर डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई के संपन्न होने के बाद एनआईए की ओर से एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किए जाने की उम्मीद है, जिसमें इस राष्ट्र-विरोधी नेटवर्क और लाल बाबू की संलिप्तता को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

By नवप्रभा टाइम्स

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