प्रणव कुमार दुबे
दिल्ली में इस बार दशहरा उत्सव एक अनूठे और सियासी तौर पर चर्चा में रहने वाले आयोजन के कारण सुर्खियों में है। हर साल पारंपरिक रूप से रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है, लेकिन इस बार इनके साथ कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस मैदान में श्री केशव रामलीला समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 फुट ऊंचे कॉकरोच के पुतले का दहन प्रस्तावित है। इस फैसले ने लोगों का ध्यान खींचा है और इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
इस पहल के पीछे श्री केशव रामलीला समिति है। समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल देवराहा ने आयोजन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति या राजनीतिक विचारधारा को निशाना बनाना नहीं, बल्कि स्वच्छता का संदेश देना है। उनके मुताबिक, यह पहल स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियान से जुड़ी है।
आयोजकों का कहना है कि कॉकरोच को गंदगी और अस्वच्छता से जोड़कर देखा जाता है। इसी प्रतीक के माध्यम से घरों, आसपास के क्षेत्रों और समाज में फैली गंदगी को दूर करने का संदेश दिया जाएगा। विधायक अशोक गोयल देवराहा ने भी स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया है। आयोजन का उद्देश्य रामलीला देखने आने वाले लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।
हालांकि, आयोजक समिति इसे स्वच्छता से जुड़ी पहल बता रही है, लेकिन इसके राजनीतिक संदर्भ को लेकर भी चर्चा हो रही है। हाल के दिनों में ‘कॉकरोच’ शब्द राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी इस आयोजन पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अपने संगठन के लिए मुफ्त प्रचार बताया। ऐसे में आयोजकों के गैर-राजनीतिक होने के दावे के बावजूद इस पहल को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
बहरहाल, इस अनूठे आयोजन ने दिल्ली के दशहरा उत्सव को चर्चा का विषय बना दिया है। पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ कॉकरोच के पुतले का दहन भी कार्यक्रम का हिस्सा है। अब यह आयोजन स्वच्छता के संदेश और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है।
