प्रणव कुमार दुबे
प्रदूषण के बढ़ते स्तर और सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हर साल की तरह इस बार भी पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर बहस छिड़ गई थी। हालांकि, अब यह साफ हो गया है कि इस साल दिवाली पर पटाखों की गूंज पूरी तरह खामोश नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय संतुलित रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न तो पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा और न ही 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, पटाखों के प्रकार और उनके इस्तेमाल के लिए समय-सीमा तय करने पर जोर दिया गया है। ग्रीन पटाखों को लेकर भी अदालत ने पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप विकल्पों पर विचार किया है। हालांकि, विस्तृत नियमों और समय-सीमा को लेकर आगे की प्रक्रिया अभी जारी है।
पारंपरिक और ग्रीन पटाखों के बीच का अंतर समझना अब हर नागरिक के लिए बेहद जरूरी हो गया है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान की ओर से विकसित ग्रीन पटाखों का उद्देश्य पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषणकारी उत्सर्जन को कम करना है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, NEERI द्वारा विकसित कुछ ग्रीन पटाखे पार्टिकुलेट उत्सर्जन में कम से कम 30 प्रतिशत और कुछ मामलों में इससे भी अधिक कमी ला सकते हैं। हालांकि, इन्हें पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त पटाखे नहीं माना जा सकता। इनमें प्रतिबंधित रसायनों और अनुमोदित संरचना से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। बाजार में प्रमाणित पटाखों की पहचान के लिए पैकेट पर क्यूआर कोड जैसी व्यवस्था भी लागू की गई है, जिससे उत्पाद की प्रमाणिकता की जांच की जा सके।
प्रशासन ने केवल पटाखों की प्रकृति ही नहीं, बल्कि उनकी बिक्री और उन्हें फोड़ने की समय-सीमा को लेकर भी नियम लागू किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों में दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए रात 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक की समय-सीमा निर्धारित की गई थी। दिल्ली-एनसीआर में पहले भी केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं के माध्यम से अनुमोदित ग्रीन पटाखों की बिक्री की व्यवस्था लागू की गई है और ई-कॉमर्स के जरिए पटाखों की बिक्री पर रोक के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, 2026 की दिवाली के लिए इन नियमों का अंतिम स्वरूप और विस्तृत समय-सीमा संबंधित अदालत और प्रशासनिक आदेशों के अनुसार स्पष्ट होगी।
इन नियमों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों, अवैध रूप से प्रतिबंधित पटाखे बेचने वालों और नियमों के खिलाफ भंडारण करने वालों पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली-एनसीआर में पहले जारी निर्देशों के तहत पुलिस और प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और जांच की जिम्मेदारी दी गई थी कि केवल अनुमोदित पटाखों की ही बिक्री हो। अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास आतिशबाजी को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। इसलिए इस साल भी लोगों को अपने क्षेत्र में जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
सरकार, अदालत और पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों की ओर से लगातार इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि त्योहार की परंपराओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन जरूरी है। त्योहार की उमंग और उत्साह में कोई कमी न आए, लेकिन साथ ही बुजुर्गों, बच्चों, सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों और जानवरों पर प्रदूषण का असर कम हो, इसके लिए आम नागरिकों से जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की जाती है। प्रशासन की ओर से जहां संभव हो, व्यक्तिगत आतिशबाजी के बजाय निर्धारित स्थानों पर सामूहिक आतिशबाजी को बढ़ावा देने की व्यवस्था की जा सकती है। इस दिवाली नागरिकों को प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल करना चाहिए, निर्धारित समय-सीमा का पालन करना चाहिए और अपने क्षेत्र में लागू स्थानीय नियमों को ध्यान में रखते हुए त्योहार मनाना चाहिए।
