प्रणव कुमार दुबे
जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए कथित वित्तीय मदद और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है, जिसके लिए धारा 4 के तहत सजा का प्रावधान है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर सभी सात आरोपियों के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार और मजबूत संदेह बनता है। हालांकि, आरोप तय होना अपराध साबित होने के बराबर नहीं है और मामले में आगे सुनवाई होगी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले में आरोप है कि पाकिस्तान स्थित संस्थानों और अन्य स्रोतों से हवाला जैसे माध्यमों के जरिए धन भारत पहुंचाया गया और बाद में उसे जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया। ईडी के अनुसार, इस धनराशि को अलग-अलग माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचाया गया था। जांच में लगभग 8.94 करोड़ रुपये की रकम को अपराध से अर्जित धन बताया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों और अशांति से जुड़े कार्यों के लिए किया गया। इन आरोपों पर अदालत ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है; ये अभियोजन पक्ष की ओर से रखे गए मामले का हिस्सा हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से वर्ष 2017 में दर्ज किए गए मूल मामले से जुड़ा है। उस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 121 और 121A के साथ-साथ गैर-कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए थे। इसी मूल मामले के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन से संबंधित जांच शुरू की थी। अदालत के सामने पेश सामग्री के अनुसार, आरोपियों पर अवैध तरीके से प्राप्त धन को अलग-अलग माध्यमों से आगे पहुंचाने और उसका इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों के लिए करने के आरोप हैं।
मामले में यासीन मलिक के अलावा जाहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, शबीर अहमद शाह, मसरत आलम और अब्दुल राशिद शेख को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत ने इन सभी सात आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान आरोपियों की व्यक्तिगत मौजूदगी से जुड़ी परिस्थितियों और न्यायिक हिरासत में बंद आरोपियों से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया पर भी अदालत के निर्देश सामने आए हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अब अदालत में जारी रहेगी।
तिहाड़ जेल में पहले से बंद यासीन मलिक के खिलाफ यह मामला उसकी लंबित कानूनी कार्यवाही का एक अलग हिस्सा है। वह पहले ही NIA के एक अन्य टेरर-फंडिंग मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहा है। अब PMLA मामले में आरोप तय होने के बाद इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। आरोप तय होने का अर्थ यह है कि अदालत ने मुकदमे को आगे चलाने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार माना है, जबकि आरोपों की अंतिम पुष्टि या दोषसिद्धि अभी बाकी है।
