प्रणव कुमार अभय
पटना: बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अनुशासन का बड़ा डंडा चलाया है। पिछले सवा महीने से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर अड़े अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों (RO) के खिलाफ विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। एक साथ 41 अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी होते ही प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है। सरकार के इस सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि जनता के काम में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस कार्रवाई की जमीन पहले ही तैयार कर दी थी। वे लगातार हड़ताली अधिकारियों को चेतावनी दे रहे थे कि जनता को परेशान कर हक की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। मंत्री ने स्पष्ट रूप से निलंबन, सेवा टूट और भविष्य में प्रमोशन रोकने की बात कही थी। अधिकारियों द्वारा इन चेतावनियों को नजरअंदाज करना अब उनके करियर पर भारी पड़ता दिख रहा है, क्योंकि विभाग ने केवल कागजी चेतावनी नहीं बल्कि सीधे निलंबन का पत्र थमाकर कड़ा संदेश दिया है।
इस सामूहिक निलंबन के बाद अब हड़ताली खेमे में फूट पड़ने और खौफ का माहौल देखा जा रहा है। राजस्व विभाग का मानना है कि सवा महीने से जमीन से जुड़े जरूरी काम ठप होने के कारण आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। सरकार की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को प्रशासनिक सुधार और जीरो टॉलरेंस की नीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कार्रवाई के बाद बाकी अधिकारी काम पर लौटते हैं या टकराव की स्थिति और ज्यादा गंभीर होती है।
