यश पांडेय
बिहार की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां नीतीश सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया है। राज्य कैबिनेट द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर बिहार के राज्यपाल ने अपनी औपचारिक सहमति दे दी है, जिसके बाद उनके मनोनयन की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही उनके विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य बनने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिस पर अब विराम लग गया है। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन में खुशी की लहर है, तो वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस मनोनयन के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि संवैधानिक नियमों के अनुसार, बिहार सरकार में मंत्री बने रहने के लिए दीपक प्रकाश का विधान सभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य होना अनिवार्य था। समय सीमा समाप्त होने से पहले ही कैबिनेट ने उनके नाम की सिफारिश राजभवन भेजी थी। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही उनके एमएलसी बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। इस मनोनयन को न केवल दीपक प्रकाश के राजनीतिक कद में बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में सरकार का एक बड़ा दांव भी माना जा रहा है।
दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाए जाने की खबर से उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और जश्न का माहौल बना हुआ है। समर्थकों का कहना है कि उनके सदन में आने से सरकार के कामकाज में और अधिक मजबूती आएगी तथा जनता की समस्याओं को सदन के पटल पर उठाने में मदद मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से सरकार ने अपने मंत्रियों को संवैधानिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ आने वाले दिनों के लिए अपनी राजनीतिक घेराबंदी भी मजबूत कर ली है।
