प्रणव कुमार दुबे
देश की राजधानी नई दिल्ली में मौसम के अचानक करवट लेते ही स्वाइन फ्लू यानी H1N1 वायरस की वापसी ने पूरी दिल्ली को खौफ के साये में ला खड़ा किया है। बीते कुछ दिनों में राजधानी के छोटे-बड़े अस्पतालों में मरीजों की तादाद में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ओपीडी के बाहर लंबी कतारें और इमरजेंसी में लगातार आ रहे सांस की तकलीफ के मामलो से यह स्पष्ट है कि स्थिति बेहद संवेदनशील होती जा रहीं हैं।
ताज़ा आंकड़ों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है, जहां अब तक दिल्ली में स्वाइन फ्लू के कुल 2,395 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। अचानक 2,395 मामले सामने आने से राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे पर दबाव काफी बढ़ गया है। अस्पतालों में रोज़ाना दर्ज हो रहे नए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि H1N1 संक्रमण बेहद तेज़ी से अपने पैर पसारता जा रहा है।
संक्रमण की खतरनाक रफ्तार और अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक आपातकालीन बैठक का निर्णय लिया। बैठक के तुरंत बाद एक अत्यंत विस्तृत एडवाइज़री जारी कर पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया है। विभाग का कहना है कि अगर इस वक्त ज़रा सी भी लापरवाही बरती गई, तो यह मौसमी बीमारी एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप धारण कर सकती है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइज़री में नागरिकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे सरोजिनी नगर, चांदनी चौक, मॉल, मेट्रो और बस स्टैंड्स पर अनावश्यक जाने से साफ तौर पर बचने की हिदायत दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, H1N1 एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है जो हवा में मौजूद सूक्ष्म बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए सेकंडों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रवेश कर जाता है। अत्यंत जरूरी होने पर ही घर से निकलने और हर हाल में गुणवत्तापूर्ण मास्क पहनने का आग्रह किया गया है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि लोग इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को कतई मामूली जुकाम या नॉर्मल फ्लू समझने की भूल न करें। यदि किसी व्यक्ति को अचानक 100 डिग्री से अधिक तेज बुखार, गले में चुभन या दर्द, लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी, अत्यधिक थकान, जोड़ों में तेज दर्द और सांस लेने में थोड़ी सी भी दिक्कत महसूस हो, तो उसे बिना एक पल गंवाए तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज ही मरीज़ को गंभीर स्थिति में जाने से बचा सकता है।
राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों—जैसे एम्स, सफदरजंग, एलएनजेपी और आरएमएल—के साथ-साथ बड़े निजी अस्पतालों को स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और पक्के मरीजों के लिए समर्पित आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। 2,395 मरीजों का आंकड़ा सामने आने के बाद अस्पतालों में वेंटिलेटर, ऑक्सीज़न सिलेंडर और विशेष एंटी-वायरल दवाओं (जैसे ओसेल्टामिविर) के पर्याप्त स्टॉक का मुआयना किया जा रहा है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में दवाओं की किल्लत न हो।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह वायरस सबसे तेज़ी से कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) वाले लोगों को निशाना बना रहा है। नवजात बच्चे, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और अस्थमा, डायबिटीज, दिल या किडनी की पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीज़ों पर इस संक्रमण का असर बेहद गंभीर और जानलेवा हो सकता है। ऐसे उच्च जोखिम वाले वर्ग को पूरी तरह से घर के सुरक्षित माहौल में रहने की सलाह दी गई है।
दैनिक दिनचर्या में स्वच्छता को वायरस से बचाव का सबसे अभेद्य कवच माना जा रहा है। एडवाइज़री में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी वस्तु को छूने के बाद अपने हाथों को तुरंत साबुन से धोएं या सैनिटाइज़र का उपयोग करें। छींकते या खांसते समय डिस्पोजेबल टिशू का प्रयोग करें और उसे बंद कूड़ेदान में ही फेंकें। बिना हाथ धोए अपने चेहरे, आंख, नाक और मुंह को छूने की आदत से पूरी तरह परहेज़ करें।
दिल्ली सरकार ने दिल्लीवासियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति भले ही चिंताजनक हो, लेकिन पूरी तरह से नियंत्रण योग्य है। सरकार की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचें और पैनिक न हों। संयम, व्यक्तिगत सतर्कता, सही मास्क का उपयोग और लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टरी परामर्श ही इस संक्रमण की चेन को तोड़ने और दिल्ली को सुरक्षित रखने का एकमात्र कारगर रास्ता है।
