प्रणव कुमार दुबे
राजधानी नई दिल्ली स्थित बार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय मुख्यालय के बाहर कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब सैकड़ों युवा वकीलों और कानून के छात्रों ने एक साथ मोर्चा खोल दिया। ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन और कॉकरोच जनता पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को ‘लीगल कॉकरोचेज प्रोटेस्ट’ का अनूठा नाम दिया गया था। प्रदर्शनकारियों का मुख्य निशाना बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा थे। हाथों में तख्तियां, बैनर और प्रतीकात्मक पोस्टर लिए वकीलों ने बीसीआई नेतृत्व के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और आरोप लगाया कि संस्थागत तानाशाही, शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों का अनियंत्रित रवैया और नए वकीलों के अधिकारों का हनन अब अपनी सीमाओं को लांघ चुका है।
इस विवाद की मुख्य पृष्ठभूमि हैदराबाद की प्रतिष्ठित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के पास आउट छात्रों के दाखिले पर रोक लगाने के बीसीआई के एक बेहद विवादित फैसले से जुड़ी हुई थी। दरअसल, नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की उपस्थिति का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया था। इसके जवाब में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए देश भर की सभी राज्य बार काउंसिलों को आदेश जारी कर दिया कि वे नालसार के इस पूरे बैच के छात्रों का वकील के रूप में पंजीकरण न करें। संस्थागत शक्ति के इस दुरुपयोग के बाद कानूनी बिरादरी में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया, जहां से कड़ी फटकार मिलने और चौतरफा दबाव बनने के बाद मनन मिश्रा को अपना आदेश वापस लेना पड़ा और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी।
हालांकि, प्रदर्शनकारी वकीलों का स्पष्ट रूप से मानना है कि केवल औपचारिक माफी मांग लेने से उनके पद के दुरुपयोग का मामला खत्म नहीं हो जाता। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने युवा वकीलों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्था की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इस ‘लीगल कॉकरोचेज’ आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया था। उनका तर्क है कि यदि शीर्ष पदों पर बैठे लोग बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के किसी पूरे बैच का भविष्य अंधकार में डालने जैसा निर्णय ले सकते हैं, तो यह पूरी कानूनी प्रणाली के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। इसके अलावा, (BBA) समेत देश भर के कई अन्य प्रतिष्ठित लीगल निकायों ने भी बीसीआई अध्यक्ष के इस आचरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनके इस्तीफे की मांग का खुलकर समर्थन किया है।
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भारी संख्या में तैनात किया गया था। ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन और सीजेपी के प्रतिनिधियों ने बार काउंसिल के सदस्यों को एक अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मनन कुमार मिश्रा स्वयं अपने पद से त्यागपत्र नहीं देते हैं या काउंसिल उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं करती है, तो यह विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। आंदोलनकारी वकीलों ने चेतावनी दी है कि वे आने वाले दिनों में देश भर के उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों के परिसरों में इस आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे, जिससे यह मुद्दा अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों ही स्तरों पर एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुका है।
