प्रणव  कुमार दुबे

बिहार के शिक्षा विभाग की साख को मजबूत करने और प्रशासनिक स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक कड़ा, स्पष्ट और कड़ा संदेश जारी किया है। एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने बिना किसी विशिष्ट अधिकारी या कर्मचारी का नाम लिए, इशारों-इशारों में उन सभी पदाधिकारियों को आड़े हाथों लिया जो अपने कर्तव्यों से भटककर अनैतिक गतिविधियों या भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि शिक्षा विभाग कोई सामान्य प्रशासनिक या राजस्व मंत्रालय नहीं है जहाँ केवल कागजी खानापूर्ति और व्यक्तिगत लाभ के लिए काम किया जाए, बल्कि यह ‘माता सरस्वती का अत्यंत पवित्र मंदिर’ है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस विभाग में तैनात हर एक छोटे-बड़े अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक की सबसे पहली और नैतिक जिम्मेदारी राज्य की शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाना, विद्यालयों के स्तर को सुधारना और बिहार के करोड़ों बच्चों के भविष्य को एक नई दिशा देना है।

भ्रष्टाचार की बढ़ती प्रवृत्ति, रिश्वतखोरी और केवल धन संचय करने की होड़ पर तीखा प्रहार करते हुए शिक्षा मंत्री ने भारतीय संस्कृति, दीपावली और लक्ष्मी-सरस्वती पूजन का एक बेहद व्यवहारिक और प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट सीख देते हुए कहा कि दीपावली और लक्ष्मी पूजा के दिन हर व्यक्ति समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी का पूजन अवश्य करे, लेकिन साल के बाकी 364 दिन केवल और केवल ज्ञान व विद्या की देवी ‘सरस्वती माता’ की आराधना में समर्पित होने चाहिए। उनके इस प्रतीकात्मक बयान का सीधा और कड़ा अर्थ यह था कि अधिकारियों को तात्कालिक आर्थिक लाभ और अवैध कमाई की लालसा को पूरी तरह त्याग कर केवल ज्ञान के प्रसार, शैक्षणिक सुधार और ईमानदारी को अपनी प्राथमिक कार्यशैली बनाना होगा। यदि विभाग के लोग पूरे समर्पण और निष्ठा के साथ अपनी सेवाएँ देंगे, तभी राज्य के सबसे दूर-दराज और अंतिम पायदान पर खड़े गरीब बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँच पाएगी।

शिक्षा मंत्री के इस रुख से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग अपने भीतर किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या बिचौलियों की मध्यस्थता को कतई बर्दाश्त नहीं करने वाला है। मंत्री द्वारा दिए गए इस कड़े और तीखे बयान के बाद से ही राज्य के प्रशासनिक गलियारों और खासकर शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के बीच हड़कंप का माहौल बना हुआ है। सरकार की प्राथमिकता अब केवल नए नियम लागू करना ही नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का निर्माण करना है। मंत्री के इस कड़े तेवर से यह साफ संकेत मिलते हैं कि विभाग जल्द ही पूरे राज्य में विशेष निरीक्षण अभियान शुरू कर सकता है, जिसके तहत दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन और विभागीय जाँच जैसी सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

By नवप्रभा टाइम्स

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