प्रणव कुमार दुबे

दिल्ली विश्वविद्यालय में आज बहुप्रतीक्षित दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया एक अभूतपूर्व उत्सव, अप्रत्याशित छात्र हुजूम और गगनभेदी नारों के बीच बेहद जोश से संचालित हो रही है। आज तड़के आठ बजते ही नॉर्थ कैंपस के प्रख्यात हिंदू, रामजस, किरोड़ीमल, हंसराज, सेंट स्टीफंस और मिरांडा हाउस से लेकर साउथ कैंपस के श्री वेंकटेश्वर, एआरएसडी तथा दयाल सिंह कॉलेज के मुख्य द्वारों पर छात्र-छात्राओं की असीमित, अनुशासित और लंबी कतारें लगनी आरंभ हो गईं। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थिरका देने वाली थाप, नीले, पीले और लाल रंगों में हवा में उड़ते लाखों प्रचार पर्चे, पटाखे फोड़कर मनाया जाता जश्न और अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के समर्थन में उठते गगनभेदी नारों ने पूरे विश्वविद्यालय परिसर को किसी राज्य के मुख्य विधानसभा चुनाव जैसी भव्यता, राजनीतिक गरिमा और अपार ऊर्जा प्रदान कर दी है।

डूसू चुनाव को केवल एक शैक्षणिक संस्थान का साधारण प्रशासनिक चुनाव नहीं माना जाता, बल्कि इसे पूरे देश की छात्र राजनीति की सबसे उर्वर, प्रभावशाली और महत्वपूर्ण नर्सरी के रूप में देखा जाता है। आज डूसू के चार सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—की चाबी किसके हाथ में होगी, इसका फैसला करने के लिए विश्वविद्यालय के लाखों छात्र अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक मंच ने देश की मुख्यधारा की राजनीति को कई बड़े और कद्दावर राजनेता दिए हैं, जो आगे चलकर संसद, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य विधानसभाओं में पहुंचे हैं; यही कारण है कि इस चुनाव के अंतिम रुझानों और नतीजों पर देश के तमाम शीर्ष राजनीतिक दलों तथा राष्ट्रीय मीडिया की सीधी और पैनी नजरें गड़ी रहती हैं।

इस चुनावी समर के समीकरणों का गहन विश्लेषण करें तो हर बार की तरह इस बार भी मुख्य और सीधी राजनीतिक भिड़ंत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के छात्र पंख नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बीच बेहद कांटे की दिखाई दे रही है। हालांकि, वामपंथी छात्र संगठनों के संयुक्त मोर्चे—आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI)—ने जमीनी शैक्षणिक मुद्दों और छात्र अधिकारों पर अत्यंत आक्रामक और नीतिगत अभियान चलाकर कई महत्वपूर्ण सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय और अत्यधिक अनिश्चित बना दिया है। सभी संगठनों ने अपने वरिष्ठ पूर्व छात्र नेताओं, राष्ट्रीय छात्र चेहरों और स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारकर क्लास-टू-क्लास जनसंपर्क से लेकर विशाल शक्ति प्रदर्शनों तक अपनी पूरी चुनावी ताकत झोंक दी है, जिससे जीत का अंतर बेहद कम रहने के आसार हैं।

इस वर्ष के चुनाव में आम विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं किसी भी प्रकार के काल्पनिक या राजनैतिक वादों से बिल्कुल परे होकर उनके दैनिक जीवन और रोजमर्रा के अकादमिक संकटों पर केंद्रित नजर आ रही हैं। बाहरी राज्यों व दूर-दराज के जिलों से पढ़ने आए विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय के हॉस्टलों की भीषण किल्लत, कमला नगर, विजय नगर, पटेल नगर और मुखर्जी नगर जैसे निकटवर्ती इलाकों में प्राइवेट पीजी मालिकों द्वारा वसूला जाने वाला अनियंत्रित किराया, कैंपस के भीतर तथा हॉस्टलों के आसपास छात्राओं की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था, और दिल्ली मेट्रो में छात्रों के लिए रियायती पास की मांग सबसे प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। इसके अलावा, कॉलेजों में मनमाने ढंग से हो रही फीस बढ़ोतरी पर तत्काल रोक, कैंटीनों में किफायती दर पर स्वच्छ भोजन और 24 घंटे सेंट्रल लाइब्रेरी खोलने की मांग पर भी छात्र बढ़-चढ़कर मतदान कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसक झड़प, गुंडागर्दी, असामाजिक तत्वों की घुसपैठ या फर्जी वोटिंग की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त करने के लिए दिल्ली पुलिस तथा डीयू प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व और अत्यंत कड़े इंतजाम किए हैं। समूचे नॉर्थ और साउथ कैंपस को सुरक्षा के दृष्टिकोण से अति-संवेदनशील जोन में विभाजित करके हजारों की संख्या में पुलिसकर्मियों, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पैरामिलिट्री बलों की टुकड़ियों को तैनात किया गया है। लिंगदोह समिति के कड़े दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने हेतु सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों और चौराहों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन्स के माध्यम से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है, और बिना वैध कॉलेज पहचान पत्र (ID Card) के किसी भी व्यक्ति को कॉलेज परिसर की सीमा के भीतर प्रवेश करने की तनिक भी अनुमति नहीं दी जा रही है।

इस बार के पूरे चुनावी परिदृश्य में सबसे अधिक आकर्षण और विशिष्ट ऊर्जा प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी छात्रों यानी ‘फर्स्ट टाइम वोटर्स’ के चेहरों पर साफ झलक रही है, जो कैंपस की इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जीवन में पहली बार भाग लेकर बेहद रोमांचित अनुभव कर रहे हैं। इसके साथ ही, इस वर्ष चुनाव प्रचार का तरीका भी पूरी तरह से आधुनिक, तकनीकी और हाई-टेक हो चुका है। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने हाथ से पर्चे बांटने की पारंपरिक शैली के साथ-साथ इंस्टाग्राम रील्स, व्हाट्सएप ब्रॉडकास्ट ग्रुप्स, फ्लैश मॉब्स, शॉर्ट वीडियोज और सोशल मीडिया मीम्स का भारी उपयोग किया है। तकनीक के इस रचनात्मक प्रयोग ने जनरेशन-ज़ी (Gen-Z) के युवाओं को सीधे जोड़ने और कैंपस में चुनावी माहौल को नया रूप देने में बेहद निर्णायक भूमिका निभाई है।

लाखों छात्रों की सुगम, निष्पक्ष और पारदर्शी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन ने मतदान प्रक्रिया को दो अलग-अलग समय पालियों में विभाजित किया है। मॉर्निंग शिफ्ट के कॉलेजों में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई, जबकि इवनिंग शिफ्ट वाले कॉलेजों में दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक मतदान सुचारू रूप से चल रहा है। चुनाव अधिकारियों का अनुमान है कि इस बार छात्रों की भारी जागरूकता और भागीदारी के कारण पिछले कई वर्षों का वोटिंग प्रतिशत का रिकॉर्ड टूट सकता है। शाम को निर्धारित समय पर मतदान समाप्त होते ही सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंटों के समक्ष तुरंत सील कर दिया जाएगा।

आज शाम मतदान की पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के पश्चात, सील की गई सभी ईवीएम मशीनों को कड़ी सैन्य सुरक्षा और डिजिटल निगरानी के बीच नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के मल्टीपर्पज हॉल में निर्मित केंद्रीय स्ट्रांग रूम में सुरक्षित पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद कल सुबह आठ बजे से मतों की आधिकारिक गिनती शुरू होगी, और दोपहर तक डूसू के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। अब पूरा देश और विश्वविद्यालय का विशाल प्रबुद्ध छात्र समुदाय यह देखने के लिए उत्सुक है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की सत्ता का सिंहासन इस बार किस छात्र संगठन के सिर सजता है।

By नवप्रभा टाइम्स

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