नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार
नई दिल्ली, 15 अगस्त। 80वें स्वाधीनता दिवस के मौके पर ‘गांधीजी की पाठशाला’ एवं सृजन साहित्यिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में गूगल मीट के माध्यम से विशेष व्याख्यान एवं कविता पाठ का आयोजन किया गया।इस वैचारिक और सांस्कृतिक सत्र की मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ की लोकप्रिय पत्रकार व लेखिका दीपाली अग्रवाल रही, जिन्होंने अपने ओजस्वी वचनों तथा कविताओं से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम की भूमिका डॉ. सुभाष गौतम ने रखते हुए कहा कि गुरु शिष्य परम्परा पर आधारित या 1489वीं पाठशाला है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना व शिक्षा का संचार किया जाता है। पाठशाला का आयोजन सहयोगी सदस्य हिमांशु, अरिमर्दन दुबे, स्नेहा शाहा और अमृत भारत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कोविड-19 ‘कोरोना काल’ जैसी विकट और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी इस अनूठी पाठशाला के निरंतर चलते रहने के संघर्षपूर्ण व प्रेरणादायी सफर को विशेष रूप से याद किया गया। संगोष्ठी के मुख्य आकर्षण विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों तथा युवा रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए भावुक एवं क्रांतिकारी कविता पाठ रहे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समां बांध दिया।इस काव्य गोष्ठी में स्नेहा ने ‘कविता पाठ की शुरुआत’ की, अमृत भारत ने इस पाठशाला में ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ कविता प्रस्तुत किया, और ऋषिराज ने ‘वीरो का कैसा हो वसंत’ शीर्षक से ओजपूर्ण काव्य पाठ किया।
इसके साथ ही, डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् इकाई उपाध्यक्ष ऋषि सिंह उपस्थित रहे तथा अमित बिश्नोई ने ‘रण बीच की चौकड़ी पर’ सिद्धार्थ ने ‘आग जलनी चाहिए’, नितिन ने ‘मैं रहूं या न रहूं हिंदुस्तान रहना चाहिए’, आयुष ने ‘आजादी’, तथा हिमांशु ने ‘लहू से आज भी मैं आज भी एक नया इतिहास लिखता हूं’, पीयूष तिवारी ने ‘क्योंकि मुझे पढ़ना है, क्योंकि मैं लड़की हूं’ विषयक कविता से सामाजिक चेतना का संदेश दिया, जबकि मुख्य अतिथि दीपाली अग्रवाल ने ‘प्रेम और इच्छा’ विषय पर अपने विचार रखते हुए पत्रकारिता व साहित्य के अंतर्संबंधों को समझाया। गोष्ठी में डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज की छात्रा ब्यूटी ने ‘नाम निर्भया भय में थी मै’, मुस्कान ‘ए भारत माता’, तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज की बी.ए. प्रोग्राम की छात्रा नंदिनी ‘मैं तीसरे स्थान का मुलजिम’ ने अपनी प्रस्तुतियां दी।
इसके अतिरिक्त, प्रशांत पाण्डेय ने ‘मेट्रो का सफर, समाज और कॉलेज’, दीपिका ने ‘मिट्टी की खुशबू में हिंदुस्तान है’ तथा अरिमर्दन ने ‘नहीं नहीं कहीं नहीं है घर’ और ‘रात्रि का कोई पहर’ जैसे भावपूर्ण पाठ किए।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि यह मंच केवल एक साधारण पाठशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर एक व्यक्ति को अपनी बात और मुखरता से अपनी आवाज़ रखने का समान अवसर प्रदान करती है। इस पूरे आयोजन का एकमात्र व मुख्य उद्देश्य एक सुसंस्कृत, संवेदनशील और सुदृढ़ समाज का निर्माण करना है।इस सफल और ऐतिहासिक आयोजन को मूर्त रूप देने में संस्था के संस्थापक डॉ. सुभाष गौतम, तथा सहयोगी सदस्य अरिमर्दन दुबे, हिमांशु,सत्यम कुमार, सक्षम पाण्डेय, वैभव शर्मा, विजय मिश्रा, स्नेहा शाहा, अमृत भारत और प्रेम कुमार की भूमिका अत्यंत सराहनीय एवं महत्वपूर्ण रही।
