आदित्य शुक्ला
नेपाल में पिछले कई दिनों से थमने का नाम न ले रही आफत की बारिश ने एक बार फिर पूरे देश में भयावह तबाही मचा रखी है। मूसलाधार बारिश की वजह से नेपाल के विभिन्न हिस्सों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भीषण भूस्खलन ने आम जनजीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। इस बेकाबू प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक कम से कम 14 निर्दोष लोगों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि 11 से अधिक लोग बाढ़ के तेज बहाव और पहाड़ी मलबे के नीचे लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें उफनती नदियों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, लगातार गिरते मलबे और रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश के चलते बचाव अभियानों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थिति पल-पल गंभीर होती जा रही है।
इस ताजा आपदा में देश का चितवन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक बनकर उभरा है, जहां हालात बेहद संवेदनशील और चिंताजनक बने हुए हैं। चितवन में बहने वाली प्रसिद्ध नारायणी नदी का जलस्तर पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच चुका है, जिसके कारण नदी ने अत्यंत विकराल और रौद्र रूप धारण कर लिया है। नारायणी नदी के जलस्तर में हुई इस अप्रत्याशित वृद्धि से निचले तटवर्ती इलाकों, रिहायशी बस्तियों, कृषि योग्य भूमि और स्थानीय बाजारों में कई-कई फीट पानी भर गया है। स्थिति को बिगड़ता देख स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया है और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को तुरंत अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों एवं राहत शिविरों में स्थानांतरित होने के सख्त निर्देश दिए हैं।
प्रकृति के इस उग्र रूप को देखते हुए नेपाल के मौसम विज्ञान विभाग और गृह मंत्रालय ने देश के लगभग 49 जिलों में बाढ़, भूस्खलन और अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण देश के कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण संपर्क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। सड़कों पर विशालकाय चट्टानें और मलबा जमा होने की वजह से प्रभावित दूर-दराज के गांवों तक एम्बुलेंस, खाद्य सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा पहुंचाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। प्रशासन द्वारा भारी मशीनों के जरिए मार्गों से मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश इस कार्य में बार-बार बाधा पहुंचा रही है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि नेपाल के नागरिक अभी हाल ही में आई पिछले महीने की भीषण आपदा के दर्दनाक मंजर और भारी नुकसान से उबरने का प्रयास ही कर रहे थे कि इस नई आफत ने उनकी उम्मीदों को तोड़कर रख दिया है। उल्लेखनीय है कि महज एक महीने पहले आई विनाशकारी त्रासदी में लगभग 1,450 लोगों की जान चली गई थी और अरबों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई थी। उस भयंकर तबाही के बाद लोग जैसे-तैसे अपने टूटे हुए आशियानों को दोबारा बनाने और अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन लगातार दूसरे महीने आई इस भीषण प्राकृतिक मार ने देश की कमर तोड़कर रख दी है और मानवीय संकट को और अधिक गहरा कर दिया है।
मौसम विभाग द्वारा जारी ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला थामने वाला नहीं है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विकट होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी नागरिकों से अत्यंत सतर्कता बरतने, नदियों के किनारों, पहाड़ी ढलानों और जलभराव वाले क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहने तथा अति-आवश्यक स्थिति न होने पर यात्रा न करने की अपील की है। आपातकालीन सेवाओं को 24 घंटे मुस्तैद रखा गया है और सभी प्रभावित जिलों के प्रशासनिक अधिकारी पल-पल की स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।
