डाकबंगला चौराहे पर गरमाए छात्र आंदोलन के बीच वायरल हुआ पहली कक्षा के बच्चे का वीडियो; भर्ती परीक्षाओं में धांधली, लाठीचार्ज और सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल, वहीं सरकार ने आंदोलन को बताया प्रायोजित राजनीति और कहा— नियमानुसार होंगी पारदर्शी बहालियां।
यश पांडेय
राजधानी पटना की सड़कों पर इन दिनों अभ्यर्थियों और छात्रों का गुस्सा पूरी तरह से चरम पर है। राज्य में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं (BPSC TRE 4), NEET विवाद, और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं का आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच पटना के डाकबंगला चौराहे पर जारी एक प्रदर्शन स्थल से पहली कक्षा में पढ़ने वाले महज 6 साल के एक मासूम बच्चे का बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे जन-आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है। हाथ में माइक संभाले इस छोटे से बच्चे ने जिस निडरता और बेबाकी के साथ लालू प्रसाद यादव के दौर से तुलना करते हुए मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री पर सीधे सवाल दागे हैं, उसने आम जनता से लेकर नेताओं तक को हैरान कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच अपनी बात रखते हुए इस मासूम ने बेहद परिपक्व और तीखे तेवर में लालू प्रसाद यादव के शासनकाल का जिक्र किया। उसने कहा कि उस दौर में भले ही बुनियादी ढांचे की अपनी चुनौतियां रही हों, लेकिन गरीब, शोषित और आम आदमी को अपनी बात रखने का हक और सामाजिक ताकत मिली थी। बच्चे ने आरोप लगाया कि आज के दौर में युवाओं और गरीबों के साथ रोजगार और पैसों के नाम पर सिर्फ छलावा किया जा रहा है। महंगे-महंगे एप्लीकेशन फॉर्म भरवाने और परीक्षा की तैयारी में लाखों रुपये खर्च करवाने के बाद भी सरकार समय से बहाली पूरी नहीं कर पाती, और युवा सालों-साल बेरोजगारी का दंश झेलने पर मजबूर रहते हैं।
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैले इस वीडियो में बच्चे की एक बेहद मार्मिक और तीखी टिप्पणी ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा अपनी ओर खींचा। आंदोलनकारी छात्रों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग और लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए मासूम ने भारी आवाज में कहा, “सड़क पर जो पुलिस ने लाठियां चलाई हैं, उससे सिर्फ किसी अभ्यर्थी का सिर नहीं फूटा है, बल्कि यह इस देश और बिहार के भविष्य का माथा फोड़ा गया है।” 6 साल के बच्चे के मुंह से निकले इस कड़े और गंभीर सवाल ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
दरअसल, पटना का डाकबंगला चौराहा, कारगिल चौक और जेपी गोलंबर पिछले कई दिनों से अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। अभ्यर्थी पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी करने और पेपर लीक माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार अड़े हुए हैं। छात्रों का साफ कहना है कि कई बार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के बावजूद सरकार उनकी बातें सुनने के बजाय प्रशासनिक ताकत के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है, जिससे राज्यभर के युवाओं में गहरा असंतोष फैल गया है।
आंदोलन के हालिया अपडेट्स की बात करें तो स्थिति उस समय और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब अभ्यर्थी राजभवन और लोक भवन की तरफ मार्च करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए जेपी गोलंबर के पास भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब उग्र छात्र बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने लगे, तो पुलिस को वाटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का इस्तेमाल करना पड़ा। इस कार्रवाई में कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से चोटिल हो गए, जबकि पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए कई छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया है। इस घटनाक्रम के बाद RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और प्रतिपक्ष के नेताओं ने छात्रों का समर्थन करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सरकार का पक्ष: “आंदोलन के पीछे राजनीतिक साजिश, सभी बहालियां पारदर्शी तरीके से होंगी पूरी”
दूसरी तरफ, विपक्ष के आरोपों और बच्चे के वायरल वीडियो पर बिहार सरकार और सत्ता पक्ष की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकार के प्रवक्ताओं और गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था और सरकारी कामकाज में व्यवधान डालने के उद्देश्य से कुछ राजनीतिक दल छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी सियासत चमका रहे हैं। सरकार का तर्क है कि 6 साल के मासूम बच्चे से इस तरह के राजनीतिक और तीखे बयान दिलवाना यह साफ दर्शाता है कि यह आंदोलन अब छात्रों का नहीं, बल्कि विपक्ष द्वारा सुनियोजित और प्रायोजित किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग और राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। परीक्षाओं को पारदर्शी और धांधली-मुक्त बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। पेपर लीक में शामिल दोषियों पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून और जांच एजेंसियां काम कर रही हैं। सरकार के मुताबिक, भर्ती प्रक्रियाओं में जो भी देरी हुई है, उसे तकनीकी और कानूनी बाधाओं को दूर कर जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासन ने यह भी अपील की है कि अभ्यर्थी उपद्रवी तत्वों के बहकावे में न आएं और अपनी बातें शांतिपूर्ण व वैधानिक माध्यमों से सरकार के समक्ष रखें।
पटना में चल रहे इस व्यापक आंदोलन के बीच 6 साल के इस बच्चे का बयान एक बड़ा प्रतीक बन गया है। एक तरफ जहां सरकार इसे राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करने में लगी है, वहीं आम नागरिक, अभिभावक और अभ्यर्थी इसे बिहार के युवाओं के दर्द और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की सबसे सच्ची तस्वीर मान रहे हैं। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों को पूरा करने का ठोस और लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
