भारती
नेपाल के पहाड़ी और मैदानी जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से बिना रुके जारी अप्रत्याशित, अभूतपूर्व और विनाशकारी मूसलाधार बारिश ने पूरे उत्तर भारत और विशेष रूप से बिहार राज्य में विनाशकारी आपदा की चेतावनी जारी कर दी है। सीमा पार नेपाल से गंडक नदी में साढ़े तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिए जाने और अत्यंत प्रचंड वेग के साथ आ रहे इस विशाल जलप्रवाह के कारण बिहार की तमाम प्रमुख नदियां खतरे के निशान को पार कर रौद्र रूप में उफान मार रही हैं। इस आसन्न महाआपदा की भयावहता और संभावित विनाश को देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है। स्थिति की गंभीरता को महसूस करते हुए राज्य के आधा दर्जन से अधिक प्रमुख सरकारी विभागों को चौबीसों घंटे पूरी तरह से ‘हाई-अलर्ट मोड’ पर रहने का बेहद कड़ा और स्पष्ट फरमान जारी किया गया है, ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।
हालात की तेजी से बढ़ती गंभीरता और जमीनी धरातल पर वास्तविक स्थिति का विस्तृत व व्यापक जायजा लेने के उद्देश्य से राज्य के मुख्य सचिव ने एक बेहद लंबी और उच्चस्तरीय आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग, जल संसाधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पथ निर्माण विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ बाढ़ के अत्यधिक खतरे से जूझ रहे तमाम जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सीधे तौर पर जोड़ा गया। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि इस भीषण संकट की घड़ी में किसी भी प्रशासनिक स्तर पर जरा सी भी ढिलाई, कोताही या लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि संपूर्ण प्रशासनिक अमले और हर एक अधिकारी का एकमात्र प्राथमिक लक्ष्य प्रत्येक नागरिक की जान-माल की सुरक्षा करना तथा प्रभावितों तक बिना किसी देरी के त्वरित सहायता और राहत सामग्री पहुंचाना होना चाहिए।
नेपाल से वाल्मीकिनगर बैराज के रास्ते गंडक नदी में अचानक छोड़े गए साढ़े तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी के प्रचंड प्रभाव को देखते हुए गोपालगंज जिले में स्थिति अत्यंत नाजुक और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। जिला प्रशासन पूरी तरह से युद्ध स्तर पर एक्शन मोड में आ गया है। स्थिति की भयावहता को देखते हुए गोपालगंज के अंचलाधिकारी खुद ग्राउंड जीरो पर उतर आए हैं और उनके द्वारा गंडक नदी से सटे निचले, तटीय व दियारा इलाकों में लगातार माइकिंग (लाउडस्पीकर) करवाकर बेहद सख्त चेतावनी जारी की जा रही है। सीओ के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीमें गांवों में घूम-घूमकर मुनादी करवा रही हैं और निचले इलाकों में रह रहे हजारों ग्रामीणों से अपील कर रही हैं कि वे बिना एक मिनट की देरी किए तत्काल प्रभाव से अपने कच्चे-पक्के घरों को खाली कर दें तथा सुरक्षित, ऊंचे स्थानों व तटबंधों की शरण ले लें, ताकि उफनती नदी की चपेट में आने से किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने नेपाल सीमा से सटे और गंडक नदी के मैदानी इलाकों में स्थित पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान और छपरा (सारण) जिलों में सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचों और तटबंधों की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त की। वाल्मीकिनगर बैराज से पानी के इस अप्रत्याशित और रिकॉर्ड डिस्चार्ज के कारण गंडक नदी अभूतपूर्व रौद्र रूप धारण कर चुकी है। इन सभी जिलों में गंडक का लगातार बढ़ता जलस्तर सीधे नदी के मुख्य तटबंधों पर अत्यधिक दबाव बना रहा है। दबाव बढ़ने के कारण कई संवेदनशील स्थानों पर तटबंधों से पानी का रिसाव और तेजी से मिट्टी का कटाव शुरू होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते नदी का उफनता पानी बहुत तेजी से नए-नए रिहाइशी इलाकों और आबादी वाले गांवों में प्रवेश कर रहा है।
गंडक नदी के इस खौफनाक रूप के साथ-साथ राज्य के अन्य प्रमुख नदी बेसिन क्षेत्रों को शामिल करते हुए कुल 14 अति-संवेदनशील जिलों—पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, छपरा (सारण), मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, खगड़िया और अररिया के जिलाधिकारियों को चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ मोर्चे पर तैनात रहने का सख्त निर्देश दिया गया है। मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंताओं, कार्यपालक अभियंताओं और वरिष्ठ फील्ड अधिकारियों को इन सभी 14 संवेदनशील जिलों में तटबंधों की चौबीसों घंटे निरंतर गश्त (पेट्रोलिंग) करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यह हुक्म भी दिया गया है कि तटबंध पर किसी भी प्रकार के रिसाव, दरार या कटाव की सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए तत्काल प्रभाव से उसकी युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाए।
पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा से लेकर गोपालगंज, सिवान और छपरा के दियारा तथा निचले मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बेहद विकराल और भयावह रूप ले चुकी है। गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान, बूढ़ी गंडक और अधवारा समूह की नदियों का उफनता पानी सैकड़ों गांवों में पूरी तरह समा चुका है, जिससे दर्जनों पंचायतों का संपर्क मुख्य सड़कों, नजदीकी बाजारों और जिला मुख्यालयों से पूरी तरह से टूट गया है। कई प्रमुख राज्य राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई है। हजारों की संख्या में बेघर हुए परिवार अपने मकानों को छोड़कर खुले आसमान के नीचे ऊंचे स्थानों, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारों और पक्के तटबंधों पर शरण लेने को विवश हैं। बाढ़ से घिरे ग्रामीण इस समय भोजन, पीने के शुद्ध पानी, तिरपाल और अपने मवेशियों के चारे के लिए भारी जद्दोजहद और संघर्ष करने को मजबूर हैं।
इस भयावह प्राकृतिक आपदा से निपटने और जलमग्न हुए सुदूर इलाकों में त्वरित बचाव व राहत अभियान संचालित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की दर्जनों अतिरिक्त टुकड़ियों को पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सिवान, छपरा और सुपौल समेत सभी 14 प्रभावित जिलों में तत्काल प्रभाव से तैनात कर दिया गया है। मुख्य सचिव ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश दिए हैं कि बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त संख्या में छोटी और बड़ी सरकारी व निजी नावों का परिचालन तुरंत सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही, बाढ़ प्रभावित आबादी के लिए बिना किसी लालफीताशाही के तत्काल सूखा राशन सामग्री बांटने, राहत शिविर बनाने और चौबीसों घंटे सुचारू रूप से चलने वाली सरकारी सामुदायिक रसोईघरों की व्यवस्था करने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं।
मानवीय सहायता और बचाव कार्यों के साथ-साथ आपदा के बाद फैलने वाली खतरनाक महामारियों से निपटने के लिए राज्य के स्वास्थ्य और पशुपालन विभागों को भी पूरी मुस्तैदी के साथ मोर्चे पर उतार दिया गया है। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में हैजा, डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए जीवन रक्षक दवाओं, सर्पदंश रोधी टीकों (एंटी-स्नेक वेनम), ओआरएस के पैकेट, हैलोजन की गोलियों और ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त स्टॉक हर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक तुरंत पहुंचाया जाए। इसके अलावा, बाढ़ में बेघर हुए मवेशियों को महामारियों से बचाने के लिए उनके सुरक्षित आश्रय स्थलों का निर्माण, समय पर जरूरी टीकाकरण और चारे की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी सीधे पशुपालन विभाग को सौंपी गई है।
मुख्य सचिव के इस बेहद सख्त रवैये और ताबड़तोड़ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के बाद पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सिवान, छपरा और मधुबनी समेत सभी 14 प्रभावित जिलों में पूरी प्रशासनिक मशीनरी युद्ध स्तर पर काम करती नजर आ रही है। इसके साथ ही, राजधानी पटना स्थित राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष को चौबीसों घंटे के लिए पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, जहां से नेपाल और विभिन्न बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कुल डिस्चार्ज, नदियों के बढ़ते जलस्तर और तटबंधों की मजबूती की पल-पल की रिपोर्ट सीधे मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी जा रही है।
मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, नेपाल के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों और बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में आने वाले दिनों में रुक-रुक कर मूसलाधार और अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। मौसम के इस रुख का सीधा और स्पष्ट संकेत है कि पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान और छपरा समेत पूरे उत्तर और पूर्वी बिहार के लिए अगले 48 से 72 घंटे बेहद नाजुक, चुनौतीपूर्ण और निर्णायक साबित होने वाले हैं। हालांकि, राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन बल और स्थानीय जिला प्रशासन किसी भी तरह की आपात स्थिति से पूरी मुस्तैदी के साथ निपटने का दावा कर रहे हैं, लेकिन नदियों के तेजी से उफनते जलस्तर और रौद्र धाराओं के बीच इन प्रशासनिक दावों की असली और कड़ी परीक्षा अब धरातल पर शुरू हो चुकी है।
