प्रणव कुमार दुबे
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) और शिक्षा विभाग ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक, डिजिटल और सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य भर के 688 मॉडल स्कूलों में ’24/7 ऑनलाइन इंटरैक्टिव लर्निंग’ सुविधा शुरू करने की घोषणा की गई है, जो सरकारी शिक्षा तंत्र के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के लागू होने के बाद कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के लाखों छात्र-छात्राओं को समय और स्थान की बंदिशों से पूरी तरह आजादी मिल जाएगी। अब विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान आने वाली किसी भी कठिन समस्या, गणित के उलझे हुए सवालों या विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को समझने के लिए अगले दिन स्कूल खुलने या ट्यूशन जाने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। छात्र दिन हो या रात, चौबीसों घंटे किसी भी समय अपने घर या स्कूल लैब से ऑनलाइन जुड़कर सीधे शिक्षकों से सवाल पूछ सकेंगे और उनका त्वरित समाधान पा सकेंगे। राज्य सरकार और बिहार बोर्ड द्वारा दी जाने वाली यह संपूर्ण विश्वस्तरीय सेवा विद्यार्थियों के लिए बिल्कुल निशुल्क होगी, जिससे गरीब और पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत छात्रों को मिलने वाला ‘व्यक्तिगत मार्गदर्शन’ (पर्सनलाइज्ड मेंटरशिप) और वन-ऑन-वन डाउट क्लीयरिंग सिस्टम है। अक्सर देखा जाता है कि बड़ी कक्षाओं में समय की कमी, संकोच या झिझक के कारण कई छात्र-छात्राएं शिक्षकों के सामने हाथ उठाकर सवाल पूछने से कतराते हैं, जिससे उनके बुनियादी कांसेप्ट कमजोर रह जाते हैं और धीरे-धीरे वे पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यार्थी बिना किसी भय या हिचकिचाहट के अपनी छोटी से छोटी शंका को भी खुलकर रख सकेंगे। इसके लिए बिहार बोर्ड ने राज्य के सर्वोत्तम, उच्च योग्यता प्राप्त और अनुभवी विषय-विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की है। यह टीम गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और अंग्रेजी जैसे कठिन माने जाने वाले विषयों पर चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। यह पैनल न केवल प्रश्नों के सही और आसान उत्तर देगा, बल्कि हर छात्र की सीखने की गति और समझ के स्तर को भांपकर उसे व्यक्तिगत रणनीतिक सलाह (पर्सनलाइज्ड लर्निंग प्लान) भी प्रदान करेगा।
यह नई व्यवस्था विशेष रूप से 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए किसी संजीवनी से कम साबित नहीं होगी। परीक्षा का समय नजदीक आते ही छात्रों पर पढ़ाई और अच्छे अंक लाने का भारी मानसिक दबाव रहता है। देर रात तक पढ़ाई और रिवीजन करते समय यदि किसी प्रश्न का उत्तर न मिले, तो छात्रों का तनाव और निराशा बढ़ जाती है। ऐसे नाजुक वक्त में 24 घंटे सक्रिय रहने वाली यह डिजिटल हेल्पलाइन उनके लिए एक मजबूत सहारे के रूप में काम करेगी, जिससे उनका तनाव कम होगा और आत्मविश्वास में भारी इजाफा होगा। केवल सवाल-जवाब ही नहीं, बल्कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों को बोर्ड परीक्षा के नवीनतम पैटर्न, मॉडल क्वेश्चन पेपर्स, उत्तर लिखने की सटीक तकनीक और समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) की विशेष टिप्स भी दिए जाएंगे। इससे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मेधावी छात्रों को भी वही कोचिंग-स्तरीय गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और एक्सपर्ट गाइडेंस मिल सकेगी, जो अब तक केवल बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थानों में ही उपलब्ध थी।
तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी 688 मॉडल स्कूलों को पूरी तरह से हाई-टेक बनाया जा रहा है ताकि इस व्यवस्था में कोई रुकावट न आए। बोर्ड का लक्ष्य है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गांव के साधारण स्मार्टफोन यूजर के लिए भी बेहद आसान और सुगम हो। इसमें छात्रों को टेक्स्ट लिखकर सवाल भेजने, कॉपी या किताब के पन्नों की फोटो खींचकर अपलोड करने और ऑडियो-वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी बात रखने जैसे बहुआयामी विकल्प दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, छात्रों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों और उनके सटीक समाधानों की एक विशाल ‘डिजिटल आर्काइव लाइब्रेरी’ भी बनाई जा रही है। इसका लाभ यह होगा कि यदि किसी छात्र को भविष्य में उसी टॉपिक का रिवीजन करना हो, तो वह पहले से मौजूद उत्तरों को देखकर तुरंत समझ सकता है। इस प्रणाली से छात्रों के बीच स्व-अध्ययन (सेल्फ-स्टडी) और तार्किक सोच की भावना को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों, अभिभावकों और छात्र संगठनों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के इस दूरदर्शी और जनकल्याणकारी कदम का पूरे दिल से स्वागत किया है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह पहल राज्य में लंबे समय से चली आ रही ‘डिजिटल खाई’ (डिजिटल डिवाइड) को पाटने और ग्रामीण बनाम शहरी शिक्षा के अंतर को समाप्त करने में गेम-चेंजर साबित होगी। बिहार के सरकारी स्कूलों का यह नया रूप निजी और महंगे कॉन्वेंट स्कूलों को सीधी टक्कर दे रहा है। बोर्ड के इस प्रयास से न केवल मैट्रिक और इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणामों का प्रतिशत और गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि राज्य के होनहार बच्चे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे JEE, NEET, CUET) के लिए भी खुद को बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगे। कुल मिलाकर, 688 मॉडल स्कूलों से शुरू हो रही यह 24/7 ऑनलाइन इंटरैक्टिव लर्निंग सुविधा बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
