यश पांडेय

राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले और प्रमुख छात्र केंद्र सत्य निकेतन इलाके में हाल ही में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। एक PG के रूप में गैर-कानूनी तरीके से संचालित की जा रही बहुमंजिला इमारत के अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह जाने से कई बेकसूर और होनहार छात्रों की असमय जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही छात्रों, अभिभावकों और आम जनता में गहरा रोष व्याप्त है। प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी के खिलाफ आवाज उठाते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने उग्र रुख अपनाया है और सरकार के सामने 7 सूत्रीय मांगों का एक विस्तृत और कड़ा मांग पत्र रखा है, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को अपनी जान न गंवानी पड़े।

CJP की पहली और सबसे प्रमुख मांग यह है कि दिल्ली के विभिन्न छात्र-बहुल इलाकों में लंबे समय से जड़ जमा चुके ‘PG माफिया’ और उनके पूरे आपराधिक सिंडिकेट की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठन का आरोप है कि बिना किसी सुरक्षा मानकों, अग्निशमन विभाग की एनओसी और स्वीकृत ढांचागत नक्शों के बेसमेंट से लेकर ऊपरी मंजिलों तक अवैध निर्माण करके इमारतों को खतरनाक पीजी में तब्दील कर दिया जाता है। यह पूरा नेटवर्क भ्रष्ट स्थानीय नेताओं, नगर निगम के अधिकारियों और लालची मकान मालिकों के बीच की मजबूत साठगांठ के बल पर बेधड़क चल रहा है। CJP ने मांग की है कि इस भ्रष्ट गठजोड़ की तह तक जाकर इसमें शामिल हर एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त आपराधिक धाराएं लगाकर उन्हें तत्काल सलाखों के पीछे भेजा जाए।

दूसरी अत्यंत महत्वपूर्ण मांग के तहत CJP ने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य सभी प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी हॉस्टलों के निर्माण पर बल दिया है। देश के कोने-कोने से हर साल लाखों छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर दिल्ली आते हैं, लेकिन सरकारी हॉस्टलों की सीटें न के बराबर होने के कारण उन्हें निजी पीजी का रुख करना पड़ता है। इसी लाचारी का फायदा उठाकर निजी पीजी माफिया छात्रों से भारी-भरकम किराया वसूलते हैं और उन्हें संकीर्ण, सीलन भरे तथा अत्यधिक असुरक्षित कमरों में रहने पर मजबूर करते हैं। यदि सरकार समय रहते पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती सरकारी हॉस्टलों का निर्माण करे, तो छात्रों को निजी पीजी माफिया के शोषण और जानलेवा हालातों का शिकार नहीं होना पड़ेगा।

तीसरी मांग के रूप में संगठन ने दिल्ली-एनसीआर के सभी शैक्षणिक क्षेत्रों, कोचिंग सेंटरों, निजी हॉस्टलों और पीजी भवनों का त्वरित और व्यापक इंजीनियरिंग-ग्रेड स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग रखी है। इसके लिए PWD और स्वतंत्र सिविल इंजीनियरों की एक समर्पित विशेष टास्क फोर्स गठित की जानी चाहिए, जो बिना किसी पक्षपात के हर इमारत की नींव, भार सहने की क्षमता, बेसमेंट की सुरक्षा और आपातकालीन निकास मार्गों की गहन जांच करे। जो भी इमारतें सुरक्षा मानकों पर खरी न उतरें या जिनमें अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई हों, उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत सील किया जाए और उनके मालिकों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।

चौथी मांग में व्यवस्था के भीतर पारदर्शिता लाने और छात्रों को गुमराह होने से बचाने के लिए एक एकीकृत सार्वजनिक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में छात्रों और उनके अभिभावकों के पास यह पता लगाने का कोई प्रामाणिक जरिया नहीं है कि वे जिस पीजी में रुक रहे हैं, वह कानूनी रूप से वैध और सुरक्षित है या नहीं। CJP की मांग है कि इस ऑनलाइन डेटाबेस पर नगर निगम और अग्निशमन विभाग से स्वीकृत सभी वैध पीजी इमारतों की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। इससे न केवल अवैध और असुरक्षित पीजी संचालकों पर स्थायी लगाम लगेगी, बल्कि दूर-दराज से आने वाले छात्र भी किसी भी धोखाधड़ी या खतरे से बचकर सुरक्षित आवास का चयन कर सकेंगे।

पांचवीं मांग के अंतर्गत CJP ने पूर्व में गठित की गई 13 जिला स्तरीय जांच समितियों की कार्य रिपोर्ट को अगले 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक करने की पुरजोर पैरवी की है। संगठन का कहना है कि अतीत में हुए हादसों और अग्निकांडों के बाद भी सरकार ने ऐसी कई जांच समितियों का गठन किया था, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी रिपोर्टें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं और कोई ठोस प्रशासनिक सुधार नहीं किया गया। सरकार को तुरंत जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि इन समितियों ने सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर और करोल बाग जैसे छात्र क्षेत्रों में वास्तव में कितनी इमारतों का धरातल पर निरीक्षण किया, उनमें क्या-क्या खामियां पाई गईं और दोषी पाए गए अधिकारियों या मालिकों पर क्या दंडात्मक कदम उठाए गए।

छठी मांग पूरी तरह से हादसे का शिकार हुए निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवारों को त्वरित न्याय और आर्थिक संबल देने से जुड़ी हुई है। CJP ने मांग रखी है कि हादसे में अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक छात्र के परिजनों को तत्काल ₹1 करोड़ की सहायता राशि प्रदान की जाए, क्योंकि किसी भी परिवार के लिए उनके बच्चे की असमय मृत्यु की भरपाई किसी भी कीमत पर नहीं की जा सकती। इसके साथ ही, हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए सभी छात्रों के संपूर्ण इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाया जाना चाहिए और उनके आगे के पुनर्वास, पढ़ाई के नुकसान तथा मानसिक आघात से उबरने के लिए उन्हें ₹20 लाख का मुआवजा तुरंत जारी किया जाना चाहिए।

सातवीं और अंतिम मांग में CJP ने इस पूरी व्यवस्थागत विफलता में शामिल उच्च मंत्रालयी और प्रशासनिक अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि हादसों के बाद केवल छोटे कर्मचारियों या ठेकेदारों पर गाज गिराकर बड़े अधिकारियों को बचा लेने का ढोंग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहरी विकास विभाग, नगर निगम और शिक्षा विभाग के जिन शीर्ष अधिकारियों की देखरेख में यह पूरा अवैध तंत्र फल-फूल रहा था, उनकी पहचान कर उन पर कड़ी प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि संबंधित मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं, तो उनसे सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक ढिलाई की कीमत किसी मासूम छात्र को अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।

By नवप्रभा टाइम्स

*नवप्रभा टाइम्स ख़बरें की दुनिया एक भारत में विस्तार के लिए सदैव तत्पर है, बिहार व उत्तर प्रदेश से आधारित समाचार और समसामयिकी चैनल है।[1] अपने भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं पर एक अद्यतन प्रदान करता है।[2] यह सेवा ऑनलाइन और इसके मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रसारित की जाती है। यह 15 जून 2020 से सेवा प्रदान किया जा रहा है। न्यूज़ पोर्टल न्यूज़ चैनल, व राजनीतिक साक्षात्कार, सामाजिक साक्षात्कार, के माननीय दर्शक हमारे ग्राहक है।‌ हमारा कौशल विविध भारतीय भाषाओं में त्वरित गति से खबर देने के लिए सदैव गतिशील है। साप्ताहिक साक्षात्कार के साथ साथ सामाजिक सेवा प्रसारण के उद्देश्य को प्रकाशित करने हेतु हमारे चैनल सर्विस प्रदान कर रहे इस दृष्टि से यह संस्था भारतीय भाषाओं की आवाज बन रही हैं।पत्रकारीय मूल्यों के साथ-साथ लोकतंत्र को परिष्कृत करने में भी हमने यथासंभव अपनी भूमिका निभाई है। करोना काल के दिनों में मानव रक्षा के लिए समाचार की जो भूमिका रही है, वह हमारा स्वर्णिम इतिहास है। निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के चलते नवप्रभा टाइम्स समाचार सत्ता प्रतिष्ठान का कोपभाजक बनता रहा है लेकिन, हमारा लक्ष्य ‘लोकतंत्र का परिष्कार और पुरस्कार’ रहा है।* सौजन्य: नवप्रभा टाइम्स जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed