प्रणव कुमार दुबे
उत्तराखंड के ऊँचाई वाले हिमालयी एवं पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण पर्वतीय ढलानों से भूस्खलन और चट्टानें खिसकने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन की चिंताएं गहरी हो गई हैं। स्थिति की गंभीरता और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष विशाल मिश्रा ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने प्रसिद्ध द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर धाम की यात्रा को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले सभी यात्रियों और श्रद्धालुओं से भावुक अपील की है कि वे वर्तमान परिस्थितियों में अपनी यात्रा की योजना को टाल दें और केवल मौसम तथा यात्रा मार्ग की ताजा आधिकारिक स्थिति की सही जानकारी प्राप्त करने के बाद ही आगे का रुख करें।
यह बड़ा प्रशासनिक निर्णय पुलिस विभाग, उपजिलाधिकारी ऊखीमठ तथा लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा संयुक्त रूप से सौंपी गई विस्तृत और जमीनी रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद लिया गया है। रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मद्महेश्वर धाम को जोड़ने वाला मस्ता-मद्महेश्वर मुख्य पैदल मार्ग वर्तमान में अत्यधिक संवेदनशील, खतरनाक और जानलेवा स्थिति में पहुंच चुका है। लगभग 14.5 किलोमीटर लंबे इस कठिन पैदल मार्ग पर तलसारी तोक से लेकर बनतोली तक कई स्थानों पर लगातार पहाड़ियों से भारी पत्थर, मलबा और मिट्टी नीचे गिर रही है। कई जगहों पर पैदल रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे यात्रियों के फिसलने या भूस्खलन की चपेट में आने का सीधा खतरा बना हुआ है, ऐसे में इस मार्ग पर आवाजाही करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
आपदा की इस अनिश्चित स्थिति को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पूरे क्षेत्र में रेस्क्यू टीमों, एसडीआरएफ, पुलिस और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों को हाई अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मार्ग में फंसे लोगों की मदद की जाए और जैसे ही मौसम में सुधार हो, प्रभावित रास्तों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए। हालांकि, जब तक मौसम पूरी तरह साफ नहीं हो जाता और विशेषज्ञ दल पैदल मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर देते, तब तक धाम की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों से संयम बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति या जानकारी के लिए स्थानीय आपदा कंट्रोल रूम तथा हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क बनाए रखने का आग्रह किया है।
