प्रणव कुमार अभय
बिहार की सियासत में इन दिनों भारी हलचल है। सत्ता के गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू हो गई है। सूत्रों का दावा है कि बंगाल चुनाव के नतीजों के ठीक बाद, यानी *मई के पहले हफ्ते में नीतीश-सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार होगा। इस विस्तार को लेकर आलाकमान ने अपनी रणनीतियां लगभग तैयार कर ली हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में शासन को नई गति देना और आगामी चुनौतियों के लिए टीम को मजबूत करना है।
इस बार का कैबिनेट विस्तार महज पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि बिहार के जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दल अपने कोटे से नए और युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी में हैं। खासकर उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है, जहां संगठन को और अधिक आक्रामक होने की जरूरत है। इस विस्तार के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह अनुभव और जोश के सही मिश्रण के साथ बिहार के विकास के अगले चरण की ओर कदम बढ़ा रही है।
बंगाल चुनाव के नतीजों का इस विस्तार से गहरा नाता बताया जा रहा है। दरअसल, पड़ोसी राज्य के चुनाव परिणाम बिहार की राजनीति पर भी मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालते हैं। इसीलिए, रणनीतिकारों ने तय किया है कि बंगाल की तस्वीर साफ होते ही बिहार में ‘ऑपरेशन कैबिनेट’ को अंजाम दिया जाएगा। इससे न केवल सरकार के कामकाज में ताजगी आएगी, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी एक नया उत्साह संचारित होगा। दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है और संभावित मंत्रियों की सूची पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है।
कैबिनेट विस्तार में सोशल इंजीनियरिंग का भी खास ख्याल रखा जाएगा। चर्चा है कि इस बार पिछड़े, अति-पिछड़े और दलित समाज के साथ-साथ सवर्णों के प्रतिनिधित्व को भी नए सिरे से संतुलित किया जाएगा। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में यह विस्तार पार्टी की उस ‘सबका साथ, सबका विकास’ वाली नीति को जमीन पर उतारने की कोशिश होगी, जिससे विरोधी खेमे में बेचैनी पैदा की जा सके। कई पुराने दिग्गज अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में हैं, तो वहीं कई कद्दावर विधायक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, मई का पहला हफ्ता बिहार की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। राजभवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की सुगबुगाहट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में अब ‘पॉवर शिफ्ट’ और परफॉरमेंस’ पर जोर रहने वाला है। जनता की निगाहें भी इस बात पर टिकी हैं कि इस नई टीम के जरिए सम्राट सरकार बिहार की बदलती राजनीतिक फिजा में अपनी पकड़ कितनी मजबूत कर पाती है। चुनाव के बाद का यह विस्तार सरकार के भविष्य का रोडमैप तय करेगा।
