महामना की तपोभूमि पर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन; उपद्रव करने वालों पर कसेगा शिकंजा, हॉस्टल से लेकर लाइब्रेरी तक लगेगा बैन। लगातार धरना-प्रदर्शन और अशांति फैलाने के आरोप में विश्वविद्यालय प्रशासन का बड़ा एक्शन; काली सूची में डाले गए छात्रों पर कसेगा शिकंजा।
यश पांडे
वाराणसी: महामना की तपोभूमि काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अनुशासनहीनता और अराजकता के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त और बड़ा कदम उठाया है। परिसर में लगातार धरना-प्रदर्शन करने, पढ़ाई का माहौल खराब करने और विश्वविद्यालय की शांति व्यवस्था को भंग करने के गंभीर आरोपों में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए लगभग 110 छात्रों को ‘ब्लैकलिस्ट’ (काली सूची में शामिल) कर दिया है। प्रशासन के इस अचानक और कड़े फैसले के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया है और छात्र गुटों में खलबली मच गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पिछले कई महीनों से परिसर में हो रही अनधिकृत गतिविधियों, मुख्य द्वारों की तालाबंदी, कक्षाओं के बहिष्कार और उग्र विरोध प्रदर्शनों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षाकर्मियों की रिपोर्ट और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच के बाद यह बात सामने आई कि कुछ चिन्हित छात्र बार-बार परिसर की शांति भंग करने और आम छात्रों के पठन-पाठन में बाधा उत्पन्न करने में संलिप्त थे। इसी आधार पर विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति की अनुशंसा पर 110 छात्रों की एक सूची तैयार कर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ब्लैकलिस्ट किए गए छात्रों पर अब कई तरह की सख्त प्रशासनिक पाबंदियां लागू होंगी। इन छात्रों को विश्वविद्यालय की आवासीय सुविधाओं (छात्रावासों), पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से वंचित किया जा सकता है। इसके साथ ही, भविष्य में इनके खिलाफ किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता पाए जाने पर सीधे निष्कासन (रेस्टिकेट) की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षा और शोध का माहौल बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, और किसी भी स्थिति में मुट्ठी भर उपद्रवी तत्वों को हजारों निर्दोष छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरे बीएचयू कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसी भी संभावित विरोध या उग्र आंदोलन से निपटने के लिए विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों, सिंह द्वार और प्रॉक्टोरियल बोर्ड कार्यालय के बाहर भारी संख्या में सुरक्षा बल और पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर छात्र संगठनों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई छात्र नेताओं ने इसे छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश करार दिया है, जबकि आम छात्रों और प्राध्यापकों का मानना है कि परिसर में शांति और शैक्षणिक माहौल बहाल करने के लिए ऐसे कड़े कदमों की बेहद जरूरत थी।
