परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रों का ‘हल्ला बोल’; विश्वविद्यालय के मेन गेट पर चक्का जाम, पुलिस से तीखी झड़प।
यश पांडे /वाराणसी
धर्म और शिक्षा की नगरी बनारस का ऐतिहासिक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) परिसर बीते दिन छात्रों के भारी आक्रोश और उग्र प्रदर्शन का केंद्र बन गया। देश में परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते बेहद आक्रामक रूप धारण कर गया, जिससे पूरे कैंपस और आसपास के सिगरा-मलदहिया मार्ग पर घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
सुबह से ही विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले सैकड़ों छात्र विश्वविद्यालय परिसर में इकट्ठा होने लगे थे। हाथों में पुतले, तख्तियां और बैनर थामे छात्रों ने “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”, “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” और “शिक्षा प्रणाली में सुधार करो” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा परिसर गुंजायमान कर दिया। आक्रोशित छात्र जुलूस निकालते हुए जैसे ही विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार की ओर बढ़े, उन्हें रोकने के लिए तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली।
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार हो रही गड़बड़ियों ने देश के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर बैठकर रास्ता पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे मुख्य सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
बढ़ते तनाव को देखते हुए कई थानों की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने और यातायात बहाल कराने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। घंटों चले कड़े गतिरोध के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के साथ ही छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया गया और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो काशी विद्यापीठ से उठी यह आंदोलन की चिंगारी पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में फैलेगी।
