अनिक मिश्रा
रविवार की अलसुबह बिहार के छपरा जिले से एक बेहद दर्दनाक और डरावनी खबर सामने आई, जहां दरियापुर प्रखंड में अचानक एक बड़ा जल हादसा हो गया। इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों ग्रामीणों की सामान्य दिनचर्या को पल भर में तबाही और दहशत में बदल दिया। देखते ही देखते कई हंसती-खेलती बस्तियों पर संकट के गहरे बादल मंडराने लगे, जिससे न केवल स्थानीय ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया, बल्कि पूरा राज्य प्रशासनिक अमला भी अचानक आपातकालीन मोड पर आ गया है।
हादसे की मुख्य वजह छपरा के दरियापुर प्रखंड से होकर गुजरने वाली मही नदी का भयानक उफान माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से नदी के जलस्तर में हो रही अप्रत्याशित बढ़ोतरी के कारण इस पर स्थित घोरहू कोठिया बांध पानी के प्रचंड दबाव को सहन नहीं कर सका। रविवार सुबह जब ग्रामीण अपने-अपने घरों में नींद से जाग ही रहे थे, तभी बांध का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। बांध के टूटते ही उफनाती मही नदी का प्रचंड जलप्रवाह बिना किसी रुकावट के पूरी रफ्तार के साथ रिहाइशी बस्तियों, पक्के मकानों, खलिहानों और लहलहाते खेतों की ओर रुख कर गया।
बांध ध्वस्त होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर नदी की तेज धार ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते करीब 25 गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गए। देखते ही देखते ग्रामीण इलाकों की सड़कें, गलियां, सरकारी स्कूल और उपजाऊ खेत पानी के आगोश में समा गए। पानी इतनी तेजी से फैला कि ग्रामीणों को संभलने और अपनी कीमती चीजों को सुरक्षित करने का मौका तक नहीं मिला। पूरे क्षेत्र में हाहाकार मच गया, जहां लोग अपने छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों की जान बचाने के लिए गृहस्थी का जरूरी सामान समेटकर बदहवास हालत में ऊंचे स्थानों की ओर भागते नजर आए।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि मही नदी के विकराल रूप के कारण घोरहू कोठिया बांध पर पिछले काफी समय से जलस्तर का भारी दबाव बना हुआ था। बांध का यह ढांचा लंबे समय से पानी की मार सह रहा था और इसकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई थी। ग्रामीणों ने पहले भी इस खतरे की आशंका जताई थी। आखिरकार रविवार की सुबह पानी का यह दबाव सहनशक्ति से बाहर हो गया और बांध का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह टूट गया, जिसके बाद प्रचंड वेग से निकले पानी ने चंद मिनटों में ही समूचे इलाके को एक विशाल टापू में तब्दील कर दिया।
घटना की भयावहता की सूचना जैसे ही जिला मुख्यालय पहुंची, पूरी प्रशासनिक मशीनरी में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए छपरा के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव तुरंत विभागीय अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और भारी पुलिस बल के साथ खुद जलमग्न घटनास्थल पर पहुंचे। डीएम ने प्रभावित इलाकों का नौकाओं के जरिए गहन निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद सिंचाई विभाग के अभियंताओं और अधिकारियों को बिना किसी देरी के युद्ध स्तर पर बांध के टूटे हिस्से की मरम्मत का काम शुरू करने का कड़ा निर्देश दिया, ताकि पानी के फैलाव को जल्द से जल्द रोका जा सके।
बाढ़ के बढ़ते खतरे और मानवीय त्रासदी को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। आपदा प्रबंधन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय राहत टीमों को तुरंत अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रभावित 25 गांवों के सबसे निचले और संवेदनशील इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ की मोटरबोट्स को तैनात किया गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावितों के लिए ऊंचे स्थानों और सरकारी भवनों में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पीने का शुद्ध पानी और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का तत्काल प्रबंध किया जा रहा है।
छपरा के अलावा राज्य के अन्य कई जिलों में भी उफनाती नदियों का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। मुंगेर जिले से आ रही रिपोर्ट के अनुसार, गंगा नदी अपने रौद्र रूप में है और वर्तमान में खतरा के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। गंगा के जलस्तर में हो रही इस लगातार बढ़ोतरी के कारण मुंगेर के दर्जनों तटीय और निचले इलाकों में नदी का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। इसके चलते हजारों परिवारों के सामने बेघर होने और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
स्थिति केवल मही और गंगा नदी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की अन्य प्रमुख नदियां भी अपना भयानक रूप दिखाते हुए लाल निशान के पार पहुंच चुकी हैं। राज्य में पुनपुन और गंडक नदियां भी अपने खतरे के मानक से काफी ऊपर बह रही हैं। इन सभी प्रमुख नदियों के लगातार उफनाने के कारण ग्रामीण और शहरी निचले क्षेत्रों में पानी का फैलाव बहुत तेजी से हो रहा है, जिससे कई प्रमुख राज्य राजमार्गों और जिला संपर्क मार्गों पर आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया है। फिलहाल राहत एवं बचाव दल चौबीसों घंटे स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित नागरिकों तक तुरंत मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
