प्रणव कुमार अभय
राजस्थान की राजधानी जयपुर से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ, सामाजिक न्याय और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल खड़ा करने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर के एक सरकारी स्कूल में शिक्षा के गिरते स्तर, बुनियादी सुविधाओं के सर्वथा अभाव और लंबे समय से पनप रही प्रशासनिक बदहाली की जमीनी हकीकत को जनता व प्रशासन के सामने लाने पहुंचे ‘सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के प्रमुख कार्यकर्ता आशुतोष रांका और उनकी पूरी टीम पर अचानक कुछ दबंग व असामाजिक तत्वों ने बर्बरतापूर्वक हमला कर दिया। स्थानीय स्कूल की बदहाल स्थिति, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और व्यवस्था की कमियों को अपने कैमरों में रिकॉर्ड कर रही इस टीम की आवाज दबाने के उद्देश्य से उपद्रवियों ने गुंडागर्दी की सारी सीमाएं लांघ दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते दर्जनों उपद्रवियों की भीड़ ने टीम को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर लाठी-डंडों व पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला बोल दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल कायम हो गया।
इस अचानक हुए हिंसक हमले में आशुतोष रांका और उनके सहयोगियों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर भागने का प्रयास किया और पास के एक सुरक्षित स्थान पर छिपकर खुद को बचाया। हालांकि, बेकाबू हमलावरों का गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ और उन्होंने सड़क पर खड़ी CJP टीम की गाड़ियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उपद्रवियों ने पत्थरों और भारी डंडों से हमला करके गाड़ियों के आगे-पीछे के सभी शीशे पूरी तरह चकनाचूर कर दिए। इस हमले में न केवल वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा, बल्कि टीम के पास मौजूद महंगे कैमरे, रिकॉर्डिंग माइक और अन्य आवश्यक डिजिटल उपकरण भी पूरी तरह तोड़कर नष्ट कर दिए गए। पीड़ित आशुतोष रांका का सीधा आरोप है कि स्कूल के नाम पर चल रहे बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार, जर्जर इमारतों की खतरनाक स्थिति और तंत्र की खामियों के सच को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए ही स्थानीय भू-माफिया और भ्रष्ट तत्वों ने इस वारदात को एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया है, ताकि भविष्य में कोई भी इस सच को उजागर करने का साहस न कर सके।
घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त हो गया, जिसके तुरंत बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही पुलिस की भारी टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को किसी तरह नियंत्रित करते हुए बुरी तरह क्षतिग्रस्त वाहनों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस प्रशासन ने घटनास्थल का मुआयना कर पीड़ित पक्ष से लिखित शिकायत प्राप्त की और अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मारपीट, संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचाने तथा काम में बाधा डालने जैसी विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है, जिससे इस हमले में शामिल सभी मुख्य साजिशकर्ताओं और हमलावरों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
इस खौफनाक घटना के सामने आने के बाद जयपुर सहित पूरे प्रदेश के सामाजिक संगठनों, मीडिया कर्मियों और नागरिक समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों, नागरिक मंचों और छात्र संघों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और जनहित की आवाज पर सीधा हमला करार दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब और वंचित तबके के बच्चों के अधिकार के लिए आवाज उठाने वालों पर इस प्रकार सरेआम हिंसक हमले होना यह साबित करता है कि तंत्र के भीतर छिपा भ्रष्ट ढांचा सच से कितना भयभीत है। आशुतोष रांका और उनकी टीम ने राज्य सरकार तथा पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी करने और टीम को सुरक्षा प्रदान करने की पुरजोर मांग उठाई है, साथ ही स्पष्ट किया है कि वे ऐसे हिंसक हमलों से घबराकर जनहित के मुद्दों पर सच दिखाने का अपना काम बिल्कुल बंद नहीं करेंगे।
