नितिन गुप्ता

देश भर के लाखों वकीलों और कानून जगत की शीर्ष नियामक संस्था, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के भीतर अचानक उठा सियासी बवंडर अब एक भीषण महासंग्राम का रूप ले चुका है। संस्था के सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर उपजे इस विवाद ने पूरे कानूनी गलियारे में हलचल मचा दी है। BCI के को-चेयरमैन YR सदाशिव रेड्डी ने सीधे तौर पर संस्था के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर बेहद संगीन और अप्रत्याशित वित्तीय धांधली के आरोप जड़ दिए हैं।

को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी द्वारा सार्वजनिक किए गए इन आरोपों ने बार काउंसिल की साख और उसकी पारदर्शिता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। रेड्डी का दावा है कि चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल के दौरान संस्था के लगभग ₹150 करोड़ के फंड का अवैध रूप से डायवर्जन किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विशाल धनराशि को BCI के निर्धारित नियमों, बजटीय प्रावधानों और तय प्रक्रियाओं को पूरी तरह से ताक पर रखकर अन्य मदों में ट्रांसफर और खर्च किया गया है।

वित्तीय अनियमितताओं के अलावा, रेड्डी ने संस्था के भीतर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक पक्षपात और मनमानी का भी गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि काउंसिल के अंतर्गत होने वाली नियुक्तियों, विभिन्न कमेटियों के गठन और वकीलों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल पसंदीदा लोगों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर संस्था को व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर चलाया जा रहा है, जिससे संस्था की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

इन तमाम आरोपों को आधार बनाते हुए को-चेयरमैन YR सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को पद से हटने के लिए 15 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर चेयरमैन अपने पद से स्वतः इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे इस मामले को देश की सर्वोच्च अदालतों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के समक्ष ले जाएंगे। इसके साथ ही वे BCI के अन्य सदस्यों को एकजुट कर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की दिशा में भी कदम उठाएंगे।

दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों के सामने आने के तुरंत बाद BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने प्रेस के सामने आकर सभी दावों का जोरदार खंडन किया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे ₹150 करोड़ के फंड डायवर्जन और पक्षपात के आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद, कपोलकल्पित और मनगढ़ंत करार दिया है। मनन मिश्रा का कहना है कि संस्था के वित्तीय प्रबंधन में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और सारा हिसाब-किताब पूरी तरह से दुरुस्त और पारदर्शी है।

चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने अपने आलोचकों और को-चेयरमैन रेड्डी पर पलटवार करते हुए इसे अपनी निजी और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे किसी भी तरह के झूठे दबाव या कानूनी धमकी से डरने वाले नहीं हैं और वे अपने पद से किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देंगे। मिश्रा ने यह भी कहा कि BCI की वित्तीय प्रणाली का नियमित रूप से कैग और अधिकृत ऑडिटर्स द्वारा ऑडिट किया जाता है, जिसमें कभी कोई खामी नहीं पाई गई।

संस्था के दो सबसे शक्तिशाली और शीर्ष पदाधिकारियों के बीच छिड़ी इस सीधी जंग ने BCI के पूरे प्रशासनिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। बार काउंसिल के सामान्य सदस्यों और विभिन्न राज्य बार कौंसिलों के प्रतिनिधियों के बीच भी अब दो गुट बनते दिख रहे हैं। एक तरफ जहां कुछ सदस्य आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर रेड्डी के समर्थन में आ रहे हैं, वहीं दूसरा खेमा मनन मिश्रा के नेतृत्व में अटूट विश्वास जताते हुए इसे संस्था को बदनाम करने का प्रयास बता रहा है।

इस अभूतपूर्व अंदरूनी विवाद ने देश भर के कानूनविदों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और युवा वकीलों को गहरी चिंता में डाल दिया है। अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए आरक्षित फंड में इतने बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोपों ने आम वकीलों के मन में संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर अविश्वास पैदा कर दिया है। कई राज्य बार एसोसिएशंस ने मांग की है कि अधिवक्ताओं के हित की रक्षा के लिए इस पूरे घटनाक्रम और वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष व निष्पक्ष जांच तत्काल प्रभाव से कराई जानी चाहिए।

फिलहाल, 15 दिनों की यह समयसीमा BCI के भावी नेतृत्व और उसकी दिशा तय करने के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाली है। आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्षों के बीच कोई सुलह की गुंजाइश नहीं बनती है, तो यह मामला सड़क से लेकर अदालत तक और अधिक उग्र रूप ले सकता है। BCI के भीतर छिड़ा यह संग्राम केवल दो पदाधिकारियों की व्यक्तिगत लड़ाई न रहकर अब संस्था की गरिमा और साख की लड़ाई बन चुका है, जिस पर पूरे देश की नज़रें टिकी हुई हैं।

By नवप्रभा टाइम्स

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