भारती

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाए जाने के सनसनीखेज आरोपों ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस कथित घटना में कई छात्रों के घायल होने और पुलिस द्वारा समय पर मामला न दर्ज किए जाने के विरोध में राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया। महीनों तक कोई कार्रवाई न होने से नाराज होकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सीधे सड़क पर उतर आए और संसद मार्ग स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। लगभग छह घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक घटनाक्रम और भारी जन दबाव के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस को झुकना पड़ा और अज्ञात लोगों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी।

यह पूरा मामला नीट परीक्षा में सामने आई धांधली और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा आयोजित एक विशाल विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने अत्यधिक बल प्रयोग करते हुए पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस दौरान 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के तुरंत बाद से ही विभिन्न छात्र संगठन और विपक्षी दल लगातार इस बात की मांग कर रहे थे कि इस अमानवीय कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

धरना स्थल पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पीड़ित छात्र साहिल लोचब की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और उसके शरीर से निकाले गए पैलेट्स (छर्रे) सार्वजनिक किए। उन्होंने दावा किया कि सीटी स्कैन रिपोर्ट में छात्र के शरीर में 200 से अधिक छर्रे धंसे होने की बात सामने आई है। बेहद दुखद स्थिति यह है कि इनमें से तीन छर्रे उसकी आंख में लगे हैं, जिससे उसकी एक आंख की दृष्टि पूरी तरह चली गई है। इसके अतिरिक्त, कुछ छर्रे छात्र के दिल के इतने करीब हैं कि डॉक्टरों के अनुसार उन्हें सर्जरी के जरिए निकालना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

धरने के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे निहत्थे युवाओं पर घातक और प्रतिबंधित हथियारों का प्रयोग सीधा-साधा लोकतंत्र का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव के कारण पीड़ित छात्र की लिखित शिकायत पर पिछले कई हफ्तों से एफआईआर दर्ज करने से बचा जा रहा था। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विपक्षी दल इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक हर मोर्चे पर लड़ेगा।

राहुल गांधी के इस धरने में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ सांसद और दर्जनों कार्यकर्ता शामिल हुए। विपक्षी नेताओं के अचानक डीसीपी कार्यालय के बाहर बैठने की खबर मिलते ही पूरे संसद मार्ग इलाके को अभेद्य छावनी में तब्दील कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया। इलाके में बढ़ते तनाव, समर्थकों की भारी भीड़ और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारियों ने राहुल गांधी से वार्ता की और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया।

प्राथमिकी दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि के बाद राहुल गांधी ने अपना 6 घंटे लंबा धरना समाप्त किया और इसे पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में केवल एक शुरुआती कदम बताया। इस दौरान पीड़ित छात्र साहिल और उसकी मां ने राहुल गांधी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर विपक्ष के शीर्ष नेता उनके समर्थन में सड़क पर नहीं उतरते, तो शायद उनकी आवाज को दबा दिया जाता और पुलिस शिकायत तक दर्ज नहीं करती। इस बीच, घटना की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे घटनाक्रम और पुलिसिया कार्रवाई के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने दिल्ली में भीड़ नियंत्रण के तरीकों और सुरक्षा बलों द्वारा किए जाने वाले बल प्रयोग की सीमाओं पर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर मुख्य विपक्षी दल इस मुद्दे को नागरिक अधिकारों के हनन से जोड़कर सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं दिल्ली पुलिस का रुख है कि मामले में विधि अनुसार एफआईआर दर्ज कर ली गई है और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। बहरहाल, जंतर-मंतर की इस घटना ने राजधानी में प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही और पैलेट गन जैसे घातक साधनों के इस्तेमाल पर फिर से कई गंभीर कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।

By नवप्रभा टाइम्स

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