डॉ सत्य प्रकाश तिवारी

बिहार की राजधानी पटना से सटे पालीगंज स्थित ‘चाणक्य स्कूल ऑफ एजुकेशन’ में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब बीएससी नर्सिंग अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। लंबे समय से अपने परिणाम का इंतजार कर रहे छात्र-छात्राओं के होश तब उड़ गए, जब रिज़ल्ट शीट पर लगभग 90 प्रतिशत परीक्षार्थियों को अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित पाया गया। सालों की कड़ी मेहनत, रातों की पढ़ाई और भारी-भरकम फीस चुकाने के बाद इस तरह के निराशाजनक परिणाम को देखकर विद्यार्थियों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया और देखते ही देखते पूरा कॉलेज परिसर जंग का मैदान बन गया।

परिणामों में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए असंतुष्ट छात्रों ने सबसे पहले कॉलेज के प्रशासनिक भवन का घेराव किया। दर्जनों छात्र-छात्राओं ने परिसर के भीतर जमा होकर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विद्यार्थियों का स्पष्ट आरोप था कि जिन्होंने पूरे साल नियमित कक्षाएं लीं और प्रायोगिक व लिखित परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया था, उन्हें भी जानबूझकर फेल की श्रेणी में डाल दिया गया है। छात्रों का कहना था कि यह महज़ एक प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि कॉलेज प्रबंधन की घोर नाकामी है जिसने सैकड़ों होनहार युवाओं के सुनहरे भविष्य पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा दिए हैं।

कॉलेज परिसर के भीतर जब प्रबंधन की ओर से कोई भी ज़िम्मेदार अधिकारी संतोषजनक जवाब देने के लिए सामने नहीं आया, तो आक्रोशित छात्रों का धैर्य जवाब दे गया। इसके बाद उग्र छात्र-छात्राओं का जत्था जुलूस के रूप में नारेबाज़ी करता हुआ सड़कों पर उतर आया। उग्र छात्रों ने रकसिया गांव के समीप बिहटा-पालीगंज राज्य राजमार्ग (SH-2) को पूरी तरह से घेर लिया और सड़क के बीचों-बीच धरना देकर बैठ गए। देखते ही देखते इस व्यस्त मुख्य मार्ग पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह से ठप्प हो गया और दोनों दिशाओं में गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।

सड़क जाम के दौरान धरना दे रहे प्रदर्शनकारी छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के अत्यंत गंभीर व सनसनीखेज आरोप लगाए। छात्रों का सीधा आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही कॉलेज प्रशासन ने परीक्षा केंद्र में ‘सेटिंग’ यानी सेंटर मैनेज कराने के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसों की मांग की थी। पास कराने और अनुकूल माहौल देने का झांसा देकर प्रबंधन ने प्रति छात्र मोटी रकम ऐंठी थी। छात्रों का कहना है कि भारी रकम ऐंठने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन में घोर लापरवाही बरती, जिसके चलते आज सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया गया है।

मुख्य सड़क पर धरने पर बैठी छात्राओं के चेहरों पर गहरा आक्रोश और आंखों में अपने करियर को लेकर साफ निराशा झलक रही थी। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर ‘चाणक्या स्कूल ऑफ एजुकेशन प्रबंधन मुर्दाबाद’, ‘हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो’ और ‘दोषियों पर एफआईआर दर्ज करो’ जैसे उग्र नारे लगाए। रोते-बिलखते कुछ छात्रों ने कहा कि नर्सिंग अंतिम वर्ष की डिग्री हासिल कर वे स्वास्थ्य सेवाओं में अपना योगदान देने और अपने परिवारों का सहारा बनने का सपना देख रहे थे, लेकिन कॉलेज की इस तानाशाही और पैसों की हवस ने उनका एक साल पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

बिहटा-पालीगंज एसएच-2 पर कई घंटों तक चले इस अप्रत्याशित चक्काजाम के कारण आम नागरिकों, यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों को भीषण परेशानियों का सामना करना पड़ा। कड़कड़ाती धूप और गर्मी के बीच बसों, ऑटो, ट्रकों और निजी वाहनों में सवार यात्री घंटों फंसे रहे। स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई आपातकालीन वाहन और गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस भी गाड़ियों के इस लंबे रेले में फंस गईं। सड़क के दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ रकसिया गांव के पास पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने उग्र छात्रों के बीच जाकर उन्हें समझाने-बुझाना शुरू किया। अधिकारियों ने छात्रों की शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों को संबंधित विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य विभाग और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा। पुलिस ने यह भी भरोसा दिलाया कि अवैध वसूली और लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों की काफी मशक्कत, आश्वासन और लंबी वार्ता के बाद आक्रोशित छात्र सड़क से हटने पर सहमत हुए, जिसके बाद ठप्प पड़े यातायात को धीरे-धीरे बहाल कराया गया। हालांकि, एहतियात के तौर पर क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बनाए रखी गई है। दूसरी ओर, असंतुष्ट छात्रों ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का पारदर्शी तरीके से पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) नहीं कराया गया और फर्जीवाड़े में शामिल कॉलेज प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और इस आंदोलन को जिला व राज्य स्तर पर ले जाने के लिए मजबूर होंगे।

By नवप्रभा टाइम्स

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