यश पांडेय
राजधानी जयपुर के 150 वार्डों में होने वाले आगामी निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव की औपचारिक तारीखों के पूरी तरह साफ होने से पहले ही शहर की सियासत में भूचाल सा आ गया है। इस बार लगभग 24 लाख मतदाता राजधानी के नए पार्षदों का चुनाव करेंगे, इसे देखते हुए राजनीतिक दलों के दफ्तरों में दावेदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर पार्षद पद का टिकट हासिल करने के लिए कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच जबर्दस्त और तीखी होड़ देखने को मिल रही है। आलम यह है कि शहर के लगभग हर वार्ड से टिकट के लिए कई-कई दावेदार सामने आ रहे हैं, जिससे पार्टी के स्थानीय नेतृत्व और चयन समितियों के लिए सही और जिताऊ उम्मीदवार चुनने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई हैं।
जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष अमित गोयल के अनुसार, पार्टी के पास अब तक 150 वार्डों के लिए 2500 से अधिक कार्यकर्ताओं ने अपने आवेदन और बायोडाटा सौंप दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में दावेदारी आने से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार पार्षद बनने के लिए कार्यकर्ताओं में कितनी ज़बरदस्त महत्वाकांक्षा और राजनीतिक सुगबुगाहट है।
इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और ध्यान खींचने वाला पहलू महिला कार्यकर्ताओं का अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उत्साह है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, कुल 2500 से अधिक आवेदनों में से लगभग 1000 आवेदन अकेले महिला कार्यकर्ताओं की तरफ से आए हैं, जो पार्टी के अंदर महिला सशक्तिकरण की एक मज़बूत और स्पष्ट तस्वीर पेश कर रहा है।
खास बात यह है कि इन महिला नेत्रियों ने केवल महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि सामान्य (अनारक्षित) वार्डों में भी खुलकर और मजबूती के साथ अपनी दावेदारी ठोकी है। उनकी इस आक्रामक और आत्मविश्वासी रणनीति ने भाजपा के पुराने और पारंपरिक चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से उलटकर रख दिया है।
सामान्य और अनारक्षित वार्डों में महिलाओं की इस दमदार एंट्री से कई दिग्गज पुरुष नेताओं, वरिष्ठ पदाधिकारियों और पूर्व पार्षदों की नींद उड़ गई है। कई पुराने और प्रर्भावशाली चेहरों की दावेदारी पर अब सीधा और बड़ा सवालिया निशान लग गया है, जिससे भाजपा के अंदरूनी खेमे और चुनावी बैठकों में भारी हलचल और बेचैनी मची हुई है।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल आवेदन का कागज़ दाखिल कर देने मात्र से किसी का टिकट पक्का नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की पिछले ढाई साल की उपलब्धियों और जन कल्याणकारी नीतियों से कार्यकर्ताओं में जोश जरूर है, लेकिन टिकट वितरण का पैमाना बेहद कड़ा होगा।
संगठन की ओर से साफ कर दिया गया है कि उम्मीदवारों के चयन का आधार केवल सिफारिशें नहीं, बल्कि वार्ड स्तर पर कराए जाने वाले गुप्त सर्वे, जनता के बीच उनकी सक्रियता और उनकी ‘जिताऊ क्षमता’ यानि विनेबिलिटी होगी। इसके साथ ही, स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ी अन्य आधिकारिक और अद्यतन जानकारियों के लिए मतदाता के पोर्टल पर जा सकते हैं।
