नितिन गुप्ता। प्रणव कुमार
डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय में आयोजित छात्र संघ चुनाव के परिणामों ने इस बार पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली की छात्र राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूरे पैनल ने महाविद्यालय की राजनीति में अपनी बादशाहत कायम रखते हुए विरोधी छात्र संगठनों का पूरी तरह से सूपड़ा साफ कर दिया। चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक रूप से मतगणना शुरू किए जाने के साथ ही एबीवीपी के प्रत्याशी शुरुआती चक्रों से ही अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर भारी बढ़त बनाए हुए थे, जो अंतिम दौर की गणना तक एक विशाल और ऐतिहासिक जनमत के रूप में बदल गई। इस एकतरफा मुकाबले में महाविद्यालय की चारों मुख्य कार्यकारी सीटों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—पर एबीवीपी का पूर्ण भगवा परचम लहराया, जिसने विपक्षी खेमों की सभी रणनीतियों, चुनावी समीकरणों और गुटबाजी को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।
अध्यक्ष पद के बहुचर्चित और सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में एबीवीपी के लोकप्रिय एवं संघर्षशील युवा उम्मीदवार जतिन चौधरी ने अपने सभी प्रतिस्पर्धियों को रिकॉर्ड तोड़ मतों के अंतर से एकतरफा जीत हासिल की। पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जतिन चौधरी का व्यक्तिगत जनसंपर्क, प्रत्येक कक्षा में जाकर छात्रों की बुनियादी समस्याओं को सुनना, प्रभावी भाषण शैली और एक निडर छात्र नेता की उनकी छवि सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। प्रथम वर्ष के नए दाखिला लेने वाले छात्रों से लेकर अंतिम वर्ष के वरिष्ठ विद्यार्थियों तक, सभी ने जतिन के नेतृत्व पर अपना अटूट भरोसा जताया।
उपाध्यक्ष पद की प्रतिष्ठित सीट पर एबीवीपी की जुझारू प्रत्याशी तनु त्रिवेदी ने अपनी असाधारण लोकप्रिय छवि, बेहतरीन संवाद क्षमता और मजबूत संगठनात्मक पकड़ का लोहा मनवाते हुए विशाल मतांतर से शानदार जीत दर्ज की। तनु त्रिवेदी के पक्ष में महाविद्यालय की छात्राओं का अभूतपूर्व समर्थन देखने को मिला, जिसे उन्होंने सुरक्षा, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन, कॉमन रूम की बदहाली दूर करने और महिला सशक्तीकरण जैसे ज्वलंत मुद्दों को प्रखर ढंग से उठाकर हासिल किया था।
सचिव पद के रणनीतिक मुकाबले में समर्पित छात्र नेता कौशिक राय ने अपनी संगठनात्मक दूरदर्शिता, अनुशासन और ज़मीनी कार्यशैली के बल पर जीत दर्ज की। कौशिक पिछले कई वर्षों से अंबेडकर कॉलेज परिसर में दाखिला सहायता केंद्र, लाइब्रेरी में नवीनतम पुस्तकों की उपलब्धता और टाइम-टेबल में सुधार के लिए चौबीसों घंटे तत्पर रहने वाला चेहरा माने जाते हैं। वहीं संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के ऊर्जावान प्रत्याशी प्रशांत सिंह ने प्रचंड मतों से बाजी मारकर पूरे पैनल के 4-0 के क्लीन स्वीप को अंतिम रूप दिया। खेल गतिविधियों से जुड़े और नए छात्रों के बीच पैठ बनाने वाले प्रशांत की यह जीत विरोधियों के लिए अंतिम कील साबित हुई।
परिणामों की आधिकारिक घोषणा होते ही पूरा महाविद्यालय प्रांगण उत्सव और विजय पर्व के स्थल में तब्दील हो गया। नव-निर्वाचित चारों युवा पदाधिकारियों को ढोल-नगाड़ों की तेज़ थाप पर समर्थकों ने कंधों पर उठा लिया। परिसर में अबीर-गुलाल उड़ाया गया और “भारत माता की जय” व “एबीवीपी जिंदाबाद” के नारों के साथ एक भव्य विजय जुलूस निकाला गया। मंच से छात्रों का आभार व्यक्त करते हुए नव-निर्वाचित अध्यक्ष जतिन चौधरी ने प्रतिबद्धता जताई कि उनकी टीम बिना समय गंवाए डिजिटल लाइब्रेरी, वाई-फाई , कैंटीन में स्वच्छता व रियायती दरें, बेहतर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और गर्ल्स कॉमन रूम की सुविधाओं को सुचारू कराने के लिए कॉलेज प्रशासन से वार्ता शुरू करेगी।
पूरे चुनाव को अत्यंत निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महाविद्यालय की चुनाव समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चुनाव प्रक्रिया का कुशल संचालन चुनाव संयोजक प्रो. सरला भारद्वाज और सह-संयोजक डॉ. जितेन्द्र नागर के नेतृत्व में पूरा हुआ। इस समिति में सदस्य के रूप में प्रो. राजबीर वत्स, डॉ. के. के. शर्मा, डॉ. राजबाला गौतम, डॉ. साक्षी, डॉ. रितु और डॉ. सुनीता शर्मा ने अपनी सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभाई, जिनकी देखरेख में पूरी मतदान व मतगणना प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय में एबीवीपी के इस 4-0 के एकतरफा क्लीन स्वीप ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के लिए एक स्पष्ट संदेश जारी कर दिया है कि ज़मीनी स्तर पर छात्रों के बीच काम करने वाले संगठनों को ही छात्र अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इस प्रचंड जीत ने जहां कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया है, वहीं आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों के लिए भी एबीवीपी का पलड़ा बेहद मजबूत कर दिया है।
