शास्त्रीय भारतीय नाट्यशास्त्र और संगीत नाटक पर अकादमिक सत्रों के साथ रूस, वियतनाम और ईरान की रंग प्रस्तुतियाँ
अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भारतीय लोक कलाकारों के साथ संगीत और नृत्य की जीवंत प्रस्तुतियों में लिया हिस्सा
नई दिल्ली, ‘साझा कहानियाँ, साझा भविष्य’ विषयवस्तु पर आधारित ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल २०२६ के दूसरे दिन नई दिल्ली में अकादमिक चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय रंग प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय इस महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता २०२६ के अंतर्गत किया जा रहा है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय इस महोत्सव में सहभागी सांस्कृतिक संस्थान के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
दिन के अकादमिक कार्यक्रम की शुरुआत ‘नाट्यशास्त्र और अभिनय कला : रस, भाव और अभिनय’ विषय पर आयोजित सत्र से हुई। इस सत्र का संचालन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसाइटी के उपाध्यक्ष एवं पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. भरत गुप्त ने किया। सत्र में शास्त्रीय भारतीय नाट्यशास्त्र की प्रमुख अवधारणाओं और अभिनय कला में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की गई।
दूसरा अकादमिक सत्र ‘संगीत नाटक : संगीत, नाटक और गति का संगम’ विषय पर आयोजित किया गया। इसका संचालन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक श्री चित्तरंजन त्रिपाठी और विद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर श्री अजय कुमार ने किया। सत्र में संगीत, नाटकीय अभिव्यक्ति और शारीरिक गतियों के बीच संबंधों तथा संगीत नाटक में उनकी भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ।
अंतरराष्ट्रीय रंग प्रस्तुतियों के क्रम में रूस की कठपुतली नाट्य प्रस्तुति ‘सर्कस ऑन स्ट्रिंग्स’ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। एंटोनोव विक्टर द्वारा परिकल्पित एवं निर्देशित इस प्रस्तुति का मंचन एस. वी. ओब्राज़्त्सोव के नाम पर स्थापित स्टेट एकेडमिक सेंट्रल पपेट थिएटर ने किया। पैंतालीस मिनट की इस प्रस्तुति का आयोजन कॉपरनिकस मार्ग स्थित एलटीजी ऑडिटोरियम में हुआ।
बच्चों और वयस्कों, दोनों के लिए तैयार इस प्रस्तुति में कठपुतलियों के माध्यम से एक कल्पनाशील सर्कस की दुनिया प्रस्तुत की गई। इसमें एक हास्य कलाकार, कलाबाजी करते बंदर, जिमनास्ट और कठपुतलियों के अद्भुत करतब शामिल थे। बंदरों द्वारा पिरामिड बनाने से लेकर हवा में उड़ने वाले और आग उगलने वाले ऊँट तक, इस प्रस्तुति ने हास्य, दृश्य वैभव और सर्कस के रोमांच के साथ कठपुतली कला की रचनात्मक संभावनाओं को दर्शाया।
इसके बाद वियतनाम की नाट्य प्रस्तुति ‘दात थेप कु ची’ अर्थात ‘स्टील लैंड’ का मंचन किया गया। प्रोफेसर ले क्वि ज़ुओंग द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस पचासी मिनट की प्रस्तुति को इंटरनेशनल स्मार्ट ग्रुप कम्युनिकेशन ने प्रस्तुत किया। वियतनामी भाषा में प्रस्तुत इस नाटक का मंचन मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर में हुआ।
यह नाटक वियतनाम की वीर माता गुयेन थी रान के जीवन पर आधारित है, जिनके आठ बच्चों और दो पोते-पोतियों की फ्रांसीसी और अमेरिकी सेनाओं के विरुद्ध राष्ट्रीय प्रतिरोध युद्धों के दौरान मृत्यु हो गई थी। डोंग दू सैन्य अड्डे की लड़ाई में मारे गए एक अमेरिकी सैनिक की आत्मा के दृष्टिकोण से प्रस्तुत यह कथा कु ची के लोगों के साहस, त्याग और अदम्य जिजीविषा को सामने लाती है। यह प्रस्तुति उन साधारण ग्रामीण लोगों के योगदान को रेखांकित करती है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
दिन के कार्यक्रम का समापन ईरान की नाट्य प्रस्तुति ‘हिडन’ के साथ हुआ। रेहानेह राज़ी और कौरोश शाहोने द्वारा लिखित इस नाटक के डिज़ाइन एवं निर्देशन की जिम्मेदारी कौरोश शाहोने ने निभाई। ईरान के ड्रामेटिक आर्ट्स सेंटर द्वारा फ़ारसी भाषा में प्रस्तुत इस नब्बे मिनट के नाटक का मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर स्थित अभिमंच ऑडिटोरियम में किया गया।
रहस्यप्रधान इस नाटक की कहानी जीन नामक एक दृष्टिबाधित व्यक्ति और उसकी पत्नी माइट के इर्द-गिर्द घूमती है। जीन अपनी पत्नी की दृष्टि पर निर्भर है। पत्नी के जन्मदिन पर आयोजित एक अप्रत्याशित समारोह के दौरान कुछ ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं, जिन्हें समझने और उनके पीछे छिपे सत्य का पता लगाने का प्रयास जीन करता है। पूरी तरह सफेद रंग में सजे बैठक कक्ष, रसोई और गलियारे जैसी न्यूनतमवादी आधुनिक मंच-सज्जा के साथ प्रभावशाली प्रकाश और ध्वनि का संयोजन नाटक के तनावपूर्ण एवं त्रासद वातावरण को और गहन बनाता है।
इसके अतिरिक्त, दिनभर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भारतीय लोक कलाकारों के साथ मिलकर दर्शकों को संगीत और नृत्य की जीवंत प्रस्तुतियों से रूबरू कराया। इन प्रस्तुतियों में राजस्थान का कालबेलिया, उत्तराखंड का मुखौटा नृत्य एवं ढोल-दमाऊ, ओडिशा का संबलपुरी लोक नृत्य और पंजाब का भांगड़ा शामिल रहे। महोत्सव के विभिन्न प्रदर्शन स्थलों और प्रमुख स्थानों पर आयोजित इन प्रस्तुतियों ने विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का उत्सव प्रस्तुत किया।
अकादमिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय रंग प्रस्तुतियों के माध्यम से महोत्सव के दूसरे दिन ने सांस्कृतिक संवाद, कलात्मक आदान-प्रदान और आपसी समझ को बढ़ावा देने में रंगमंच की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। इस दिन के कार्यक्रमों में शास्त्रीय भारतीय रंग परंपराओं और सहभागी देशों की समकालीन नाट्य अभिव्यक्तियों का संगम देखने को मिला, जो महोत्सव की विषयवस्तु ‘साझा कहानियाँ, साझा भविष्य’ को सार्थक रूप से प्रतिबिंबित करता है।
ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल २०२६ का समापन १४ अक्टूबर को होगा। अंतिम दिन इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका और कज़ाखस्तान की नाट्य प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी। इसके बाद समापन समारोह तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल की प्रस्तुति ‘लौह पुरुष : सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन और विरासत’ का मंचन किया जाएगा।
